नोटबंदी के बाद जमीनों की खरीद फरोख्त काफी कम हो गई है। इससे राजस्व को भी काफी चपत लगी है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन इस बार जमीन के सर्किल रेट बढ़ाने के मूड में नहीं है।
शासन के आदेश पर हर साल सर्किल रेट की दरें तय की जाती हैं। आमतौर पर सर्किल रेटों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होती है। हर वर्ष की तरह इस बार भी एक अगस्त से नए सर्किल रेट लागू होने हैं,
लेकिन इस बार स्थानीय प्रशासन सर्किल रेट बढ़ाने के मूड में नहीं दिख रहा है। दरअसल, नोटबंदी के बाद बाजार में मंदी आई है। प्रॉपर्टी से जुड़ा कारोबार लगभग चौपट हो गया है। लोग जमीन लेने में किसी प्रकार की दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
रजिस्ट्री विभाग में भी सन्नाटा रहने लगा है। इससे राजस्व को भी काफी चपत लगी है। जिला प्रशासन को मिलने वाले राजस्व के लक्ष्य में रजिस्ट्री विभाग की तरफ से काफी सहयोग रहता था लेकिन मंदी की मार ने जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि कर एवं निबंधन विभाग ने रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मिलकर नए सर्किल रेट की दरें निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है लेकिन जिला प्रशासन इस बार सर्किल रेट बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।
डीएम कृष्णा करुनेश ने बताया कि नोटबंदी के बाद प्रापर्टी कारोबार में मंदी है। इसका असर राजस्व वसूली पर भी पड़ा है। ऐसे में इस बार सर्किल रेट नहीं बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। अगर शासन द्वारा सर्किल रेट को लेकर कोई आदेश आता है तो रेटों में बढ़ोत्तरी करना मजबूरी होगी।