सिंभावली क्षेत्र के गांव वैट का भूजल दूषित हो गया है। इसके चलते शासन ने करोड़ों की लागत से पाइपलाइन पेयजल सप्लाई के लिए ओवर हेड टैंक का निर्माण तो करा दिया है, लेकिन अभी तक इससे सप्लाई नहीं मिल रही है।
ऐसे में कैंसर और हेपेटाइटिस लोगों की जिंदगी को लील रहे हैं। बीमारी फैलने पर वैट के ग्राउंड वाटर की जांच कराई गई थी। इसके दूषित होने की पुष्टि के बाद शासन ने गांव में नलकूप लगवाकर पानी की टंकी का निर्माण कराया था।
भूमिगत लाइन बिछाने पर दस करोड़ खर्च हुए हैं। टंकी निर्माण को चार महीना बीतने के बाद भी सप्लाई चालू नहीं हुई है। मजबूरी में ग्रामीणों को निजी व सरकारी हैंडपंपों से निकल रहे दूषित पानी को प्रयोग करना पड़ रहा है।
इससे गांव में कैंसर और हेपेटाइटिस का प्रकोप फैल रहा है। इससे दो माह में शाहीन, इकराम, रफीक, रईस, जाहिद, इस्लाम, रुखसाना समेत एक दर्जन से अधिक ग्रामीणों को मौत हो चुकी है। गांव में महिलाओं समेत दर्जनों ग्रामीण बीमारी की गिरफ्त में हैं।
क्षेत्र को दूसरा सबसे बड़ा गांव होने के बाद भी वैट में स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है। सिंभावली, गढ़ और बहादुरगढ़ क्षेत्र में कैंसर का कहर तीन दर्जन गांवों में फैला है। शराब फैक्ट्री, शुगर मिल और दूध प्लांटों के दूषित पानी वाले नाले पूठ गंगा में गिर रहे हैं।
शासन स्तर से गंगा को साफ सुथरा बनाने के लिए बड़े स्तर पर कवायद हो रही है, लेकिन इसके बाद भी गंगा में जहरीला पानी डाल रहे नालों की कोई रोकथाम नहीं हो पा रही है।
मेरठ के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.पीके शुक्ला का कहना है कि हेपेटाइटिस बी और सी से होने वाले कैंसर की रोकथाम के लिए अब इलाज तो उपलब्ध है, लेकिन लाखों की रकम खर्च होने से गरीब तबके की पहुंच से बाहर है।
डॉ.एके सिंह का कहना है कि अगर किसी गांव में बीमारी फैल रही है, तो वहां टीम भेजकर रोगियों की जांच और इलाज कराया जाएगा।