दिवाली पर जरा सी चूक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। दिवाली पर पटाखे से निकली चिंगारी आग का रूप ले सकती है। ऐसे में भयंकर आग लगी तो संसाधनों की कमी सुरक्षा में बाधा बन सकती है। फायर विभाग के पास आग से निपटने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं है।
हालांकि एक अतिरिक्त फायर टैंकर की मांग की जा चुकी है। जिले की आबादी लगभग 14 लाख है। जिले की सीमा काफी लंबी चौड़ी है। हापुड़ की सीमा पिलखुवा से लेकर ब्रजघाट तक लगभग साठ किलोमीटर है। जबकि किठौर बार्डर व मेरठ बार्डर की सीमा भी जिले से 30 किलोमीटर है।
ऐसी स्थिति में जनपद के किसी छोर पर आग लगने की सूचना तुरंत दी जाए तो फायर ब्रिगेड को मौके पर पहुंचने पर एक घंटा लगना तय है। तब तक सब कुछ जलकर राख हो जाएगा। ऐसे में संकरी गली में आग लगने पर हालात और खराब हो जाने की संभावना रहती है।
दिवाली पर आग की घटनाओं में बढ़ोत्तरी होने की आशंका रहती है क्योंकि एक पटाखे से निकली चिंगारी तबाही मचा सकती है। जिले में हापुड़ नगर व गढ़ में फायर स्टेशन है। इन स्टेशनों पर दो वाटर टैंकर, दो वाटर मिक्स स्माल टैंकर, दो वाटर बैग, एक हाइड्रोक्लोरिक कटर मौजूद है।
इन दोनों स्टेशनों पर एक मुख्य अग्निशमन अधिकारी, एक निरीक्षक अग्निशमन अधिकारी, एक सहायक अधिकारी, 9 लीडिंग फायर मैन, 10 ड्राइवर व 30 फायर मैन उपलब्ध हैं। पिछले वर्ष पटाखे की चिंगारी से दिल्ली रोड व बुलंदशहर रोड पर कबाड़ की दुकान में आग लग गई थी।
इसके अलावा कई गांवों में बौंगे बिटौरे जलकर राख हो गए थे। इसके अलावा पटाखा चिंगारी से कई मासूम भी मामूली रूप से झुलस गए थे। दिवाली पर आग की घटनाओं को रोकने के लिए अग्निशमन विभाग सतर्कता के दावे कर रहा है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिमेष सिंह का कहना है कि आग से बचाव के लिए फायर कर्मियों को सतर्कता से ड्यूटी करने की हिदायत दी गई है।
इसके अलावा नगर के रामलीला मैदान सहित अलग अलग क्षेत्रों में बिकने वाले पटाखों की दुकान पर सीज फायर सिलेंडर सहित अन्य संसाधन पूर्ण रूप से दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा एक फायर टैंकर की मांग मेरठ से की गई है। जो जल्द उपलब्ध हो जाएगा।