केंद्र सरकार की ओर से आने वाले दिनों में जीएसटी कानून लागू किए जाने पर भी मंडी शुल्क वसूले जाने से परेशान जिले के खाद्यान्न व्यापारियों में रोष है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि व्यापारियों की मंडी शुल्क खत्म करने की मांग को सरकार ने खारिज कर उनपर दोहरे कर के रूप में मंडी शुल्क लागू रखने की घोषणा कर दी है, जिससे निश्चित रूप से प्रदेशभर में खाद्यान्न व्यापारी प्रभावित होंगे।
उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग राज्यों में डेढ़ फीसदी से चार फीसदी तक मंडी शुल्क चुकाना होता है। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में यह मय सैस के ढाई प्रतिशत है। जीएसटी लागू होने के बाद भी मंडी शुल्क चुकाना व्यापारियों के साथ नाइंसाफी है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार का तर्क है कि मंडी टैक्स से प्राप्त होने वाली धनराशि राज्य सरकार के खजाने में नहीं जाती, बल्कि उसका प्रयोग मंडियों के रखरखाव, प्रबंधन और स्टाफ के लिए किया जाता है।
प्रदेश में जीएसटी व मंडी शुल्क दोनों लागू होने से व्यापारी का भारी उत्पीड़न होगा, समय रहते यदि सरकार द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो जिले के खाद्यान्न व्यापारी सड़कों पर संघर्ष करेंगे।
केंद्र सरकार की ओर से लागू किए जा रहे जीएसटी कानून को लेकर शहर के व्यापारियों में इसके कई नियमों को लेकर रोष है। शनिवार दोपहर शहर के व्यापारी पिलखुवा बस स्टैंड पर एकत्रित होकर उन्होंने हंगामा किया और जीएसटी कानून का विरोध किया।
शनिवार दोपहर साढ़े 12 बजे शहर के अनेक परचून, दवा, कपड़ा एवं खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले व्यापारी एकत्रित हुए। इस दौरान उन्होंने जीएसटी का विरोध किया। व्यापारियों का कहना था कि जीएसटी लागू होने से कारोबार पर प्रभाव पड़ेगा। सभी को अकाउंटेंट रखने पड़ेंगे।
कारोबार वैसे ही मंदे चल रहे हैं। अब जीएसटी के लागू होने से कारोबार और भी चौपट होने का डर है। जीएसटी को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार को छोटे व्यापारियों को जीएसटी में छूट देनी चाहिए ताकि यहां व्यापार करने वाले व्यापारियों को दिक्कतें नहीं हो सकें। हंगामा करने में लोकेश, बबलू, जयभगवान, सुनील, विनोद, बिन्नू, संजय, राजकुमार, तुषार, अभिषेक, मोहन, राजपाल, गोपाल, सुनील, अजय शामिल रहे।