बड़ी तादाद में रोडवेज और प्राइवेट बसें चुनाव में चली गई है। जिसके चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ गया। मेरठ, बुलंदशहर, दिल्ली समेत अन्य रूट की बसों में चढ़ने के लिए मारामारी मची रही। जिस कारण यात्रियों को डग्गामार वाहनों में सफर करने को मजबूर होना पड़ा।
विधानसभा चुनाव में सुरक्षाबलों व पोलिंग पार्टियों की रवानगी के लिए जिला प्रशासन ने रोडवेज और प्राइवेट बसों की मांग की थी। इसी के मद्देनजर रोडवेज प्रशासन ने 50 बसों के चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने की योजना तैयार की थी। वहीं सुरक्षा बलों की बढ़ी तादाद के चलते चुनाव ड्यूटी में प्राइवेट बसों की संख्या भी बढ़ा दी गई है।
अब तक चुनाव ड्यूटी के लिए 50 बसें रोडवेज द्वारा जिला प्रशासन को देने की योजना थी। इनमें से बड़ी तादाद में बसों को बृहस्पतिवार को रवाना कर दिए जाने के चलते बस स्टैंड पर गंतव्य तक जाने के लिए पहुंचे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बसों की उपलब्धता में कमी होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्राइवेट बसों को भी चुनाव ड्यूटी में लगा दिए जाने से लोग बेहद परेशान दिखे। मेरठ, बुलंदशहर, दिल्ली, समेत अन्य मार्गों को जाने वाली बसें खचाखच भरी रहीं।
वहीं बसों के देर से आने के चलते यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। रोडवेज बसों की कमी का निजी बस संचालकों, टैक्सी चालकों व डग्गामार वाहनों ने खूब चांदी काटी और यात्रियों को भी इन वाहनों में सफर करने को मजबूर होना पड़ा।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक एनपी सिंह ने बताया कि डिपो की 50 बसें विधानसभा चुनाव ड्यूटी में दे दिए जाने के कारण नियमित सेवाओं पर असर पड़ा है। बसों की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।