हापुड़। मेरठ रोड फ्लाईओवर को 12 दिन बंद रख हजारों लोगों को परेशान किया गया। मरम्मत के नाम पर 35 लाख रुपये खर्च भी कर दिए लेकिन इसकी स्थिति अब भी बदहाल है। ज्वाइंट्स के बीच गैप बने हैं। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे भी दुर्घटना का सबब बन रहे हैं। जिन स्थानों पर कार्य किया गया है, वहां भी आसपास गड्ढे हैं। वाहन चालकों का कहना है कि पहले जैसे ही स्थिति अब भी सामने आ रही है।
हापुड़ शहर को मोदीनगर, मेरठ से जोड़ने के लिए मेरठ रोड पर फ्लाईओवर बना है। इसमें कई स्थानों पर जोड़ दरक रहे हैं, गड्ढे भी बने हैं। हजारों लोग हर रोज इस पुल से आवागमन करते हैं। समस्या को देखते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने इसे दुरुस्त करने के लिए 10 जून की रात से 12 दिन तक पुल को बंद रखा था। इन 12 दिन में छह जोड़ों पर ही कार्य किया गया है। जबकि इसके दोगुने जोड़ों के बीच अब भी गैप अधिक बना हुआ है।
पुल के ऊपर से मोदीनगर की ओर जाने वाले रास्ते पर भी जोड़ दरक रहे हैं। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे हैं, मेरठ की ओर जाने वाली सड़क की स्थिति भी वैसी ही है। छोटे टायर वाले वाहनों को परेशानी अधिक हो रही है। एंबुलेंस में जाने वाले मरीज भी पुल को आसानी से पार नहीं कर पा रहे।
पुल के ऊपर जाने से पता चलता है कि हापुड़ की ओर वाले हिस्से में ही सिर्फ छह ज्वांटों पर कार्य किया गया है। इसके आस पास भी सड़क में गड्ढे बने हैं। वहीं, इस पुल के नीचे मेरठ रोड रेलवे लाइन के नीचे बना अंडरपास अभी तक चालू नहीं हुआ है।
ऐसे में पुल के ऊपर समस्या होने पर नीचे से जाने की सुविधा लोगों को नहीं मिल रही है। प्राधिकरण की स्वीकृत कॉलोनी पंचशील के लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
बोले लोग
पीडब्ल्यूडी ने 12 दिन तक पुल को बंद रख, कार्य कराया। लेकिन अभी भी पुल गड्ढा युक्त है। पुल पर बहुत कम काम हुआ है, अभी भी गड्ढे बने होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। अब बरसात शुरू हो जाएगी, इसमें परेशानी और बढ़ जाएगी।-विश्वनाथ, प्रदेश अध्यक्ष, विधि प्रकोष्ठ व्यापार मंडल।
फ्लाईओवर को 12 दिन तक बंद रखा गया, मेरठ रोड आवास विकास, सर्वोदय कॉलोनी समेत हजारों लोगों को शहर तक जाने में परेशानी हुई। लेकिन स्थिति अभी भी बदहाल है, इस कार्य का कोई खास लाभ नहीं दिख रहा है। अधिकारियों की इसमें जवाबदेही तय होनी चाहिए।रुद्राक्ष त्यागी, सभासद।
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कोट
पुल पर छह स्थान चिह्नित किए गए थे, वहां ज्वाइंट बदलवा दिए गए हैं। दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। जहां जरूरत होगी, वहां मरम्मत करा दी जाएगी। आवागमन में परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जा रहा है। - शैलेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता
विश्वजीत।