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Hapur News: 600 करोड़ के बिल घोटाले से जुड़े 250 लेजर मेरठ ले गई टीम

Tue, 28 Nov 2023 09:37 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। 600 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले से जुड़े करीब 250 लेजर और चालान बुक हापुड़ के रिकॉर्ड रूम से मेरठ भेजे गए हैं। एमडी कार्यालय से गठित जांच टीम इन दस्तावेजों को साथ ले गई। ऐसे में अब पुराने नलकूप कनेक्शन का यहां रिकॉर्ड नहीं है। ऑनलाइन एंट्री होने से जो कनेक्शन छूट गए हैं, उन पर बकायेदारी का पता भी नहीं चल रहा है। यह मामला 25 हजार किसानों से जुड़ा है।
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वर्ष 2004 से ही नलकूप बिल घोटाले की जांच चल रही है, अनेक संस्थाएं पड़ताल कर चुकी हैं। लेकिन अधूरे दस्तावेज और गुम हुई चालान बुक घोटाले की तह तक नहीं पहुंचने देती। एमडी कार्यालय से एक विशेष टीम का गठन हुआ, जो हापुड़ के रिकॉर्ड रूम से नलकूप बिल घोटाले से जुड़े दस्तावेज अपने साथ ले गई। इन दस्तावेजों में पुराने लेजर, चालान बुक और बिल बुक भी शामिल हैं। हापुड़ के रिकॉर्ड रूम में अब इस घोटाले से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में बहुत से कनेक्शन अभी भी ऑनलाइन होने से वंचित रह गए। ऐसे किसानों के वास्तविक बिल पता नहीं चल पा रहे हैं। एमडी कार्यालय से भी दस्तावेजों का मिलना आसान नहीं है, क्योंकि पहले इसके लिए अधीक्षण अभियंता को अनुमोदन देना होगा।


-यह था मामला-

बिल घोटाले की पटकथा वर्ष 1985 से ही शुरू हो गई थी, क्योंकि उस समय सब रसीदें मैनुअल ही कटती थी। हर महीने के हिसाब से एक लेजर बनता था और एक महीने में एक चालान बुक भी मिलती थी। उस दौर में रसीदों को फर्जी तरीके से काटकर कुछ कर्मचारी अपनी जेब भरते रहें। किसानों की किताबों में तब एंट्री होती थी, किसान एंट्री के बाद संतुष्ट हो जाते थे कि उनका बिल जमा हो गया है। मामला वर्ष 2004 में खुला तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरी। कई संस्थाओं ने इस मामले की जांच की, लेकिन निष्कर्ष नहीं निकल सका। वर्ष 2019 में तत्कालीन डीएम अदिति सिंह ने शासन में पत्राचार कर, जांच शुरू कराई। जांच के दौरान रिकॉर्ड रूम खंगाले गए। बताया गया है कि करीब 19 सालों के रिकॉर्ड से 60 लेजर और 70 चालान बुक गायब हैं। निगम के ही एक उच्चाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर यह आंकड़े साझा किए हैं।
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वर्ष 2004 में सिर्फ 120 करोड़ थी घोटाले की राशि

ऊर्जा निगम के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2004 में जब इस घपले की परतें खुली थी तब घोटाला महज 120 करोड़ का था। इसमें 85 लाख रुपये मूल था और 35 लाख रुपये ब्याज बन रहा था। उस समय सकारात्मक जांच कर कार्रवाई होती तो किसानों को अब तक राहत मिल चुकी होती।



अब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर या कैबिनेट से ही राहत की उम्मीद

घोटाले की राशि 600 करोड़ से अधिक हो गई है। इतनी राशि को संशोधित करना या खत्म करना किसी स्थानीय अधिकारी के बस की बात नहीं है। ऊर्जा निगम के अधिकारी मानते हैं कि इस राशि को बिलों से हटाने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर या कैबिनेट को ही फैसला लेना होगा।



वर्ष 2006 में बिलों को संशोधित करने का हुआ था प्रयास

वर्ष 2006 में ऐसे बिलों को संशोधित करने का प्रयास हुआ था। उस समय ओटीएस योजना लागू थी, बहुत से किसानों की पेनाल्टी और जुड़कर आ रही बकायेदारी को खातों से हटाया गया लेकिन, मामला बढ़ा तो फिर से अधिकारियों ने हटाई गई राशि को खातों में जोड़ दिया।



-उच्च स्तर पर चल रही जांच-

नलकूप बिलों से जुड़े मामले की उच्चस्तरीय जांच हुई है। जांच टीम यहां से रिकॉर्ड भी साथ ले गई है। इस मामले में जैसा आदेश मिलेगा, उसका पालन कराया जाएगा।यूके सिंह, अधीक्षण अभियंता।
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