खेतों में हरी खाद उगाने के लिए किसानों को कृषि विभाग से ढैंचा का बीज नहीं मिल पा रहा है। बीते तीन वर्ष से किसान छूट पर बीज पाने के लिए कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। जिले की मृदा में पोषक तत्व न्यूनतम से भी कम पहुंच चुके हैं।
मृदा परीक्षण विभाग की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हो चुकी है। यह रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई थी। मामले की गंभीरता पर शासन ने कृषि अफसरों को किसानों को हरी खाद, जैविक खेती की जानकारी से अवगत कराने के निर्देश दिए थे।
इन दिनों गेहूं के खेत खाली हो चुके हैं, जल्द ही खेतों में किसान धान की रोपाई करेंगे। इस बीच मृदा स्वास्थ्य बढ़ाने के लिए हरी खाद की बुवाई की जाती है। ढैंचा अल्प अवधि में ही विकसित हो जाता है,
इसका खाद खेतों की उर्वरक शक्ति को बढ़ा देता है। लेकिन कृषि विभाग में अभी तक भी ढैंचा का बीज नहीं पहुंच सका है। आलम यह है कि बाजार में ढैंचा का बीज काफी महंगा है। बहुत से किसान इतनी दरों पर यह बीज खरीद पाने में असमर्थ हैं।
मजबूर किसान आए दिन छूट पर बीज पाने के लिए कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी धीरज सिंह का कहना है कि वह ढैंचा के बीज की डिमांड उच्चाधिकारियों से कर चुके हैं। ऊपर से बीज मिलते ही किसानों को बीज उपलब्ध करा दिया जाएगा।