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फिर गंगा खतरे के निशान के पार, खादर क्षेत्र जलमग्न

Sun, 17 Jul 2016 09:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
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समुद्रतल से खतरे के निशान 198.36 मीटर से ऊपर पहुंचा जलस्तर - फोटो : अमर उजाला
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गंगा फिर उफान पर हैं। दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार जलस्तर खतरे के निशान के पार कर गया है। इसके चलते खादर क्षेत्र जलमग्न हो चुका है। हजारों हेक्टेयर खेतों में लगी फसलें डूब गई हैं। खादर के गांवों में दहशत का माहौल है।
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बाढ़ की आशंका से तहसील प्रशासन सतर्क हो गया है। राहत चौकियों को अलर्ट रहने के फिर से निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक के दावों को धता बताकर रविवार सुबह गंगा खतरे के निशान के पार कर गई।

समुद्रतल से 198.36 मीटर पर अंकित लाल निशान को लांघने के बाद भी रविवार देर शाम जलस्तर में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा। इससे पहले भी तीन जुलाई को गंगा खतरे के निशान को लांघ चुकी थी, जिससे हजारों हेक्टेयर जंगल में लगी फसलें डूब गई थीं।
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खतरे के निशान पार करने के बाद भी लगातार जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। तत्काल प्रभाव से राहत चौकियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

केंद्रीय जल आयोग के कनिष्ठ अभियंता राहुल शर्मा और गेज अधिकारी संत कुमार का कहना है कि रविवार की देर शाम गंगा का जलस्तर बढ़कर समुद्रतल से 198.35 मीटर के निशान पर पहुंच गया है, वहीं इसके बाद भी बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है।

तहसील प्रशासन ने जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए पांचों राहत चौकियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार भगत सिंह ने बताया कि आलमपुर, भगवंतपुर, अब्दुल्लापुर, नक्का कुआं, मीरा रेती और ब्रजघाट में राहत चौकियां बनाई गई हैं।

इन चौकियों में जरूरत पड़ने पर जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। यहां बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग परिवार और मवेशियों के साथ शरण ले सकते हैं। एसडीएम शमशाद हुसैन ने रविवार को ब्रजघाट समेत खादर क्षेत्र का दौरा कर बाढ़ संभावित गांवों के जंगल में हो रहे जलभराव का जायजा लिया।

इस दौरान एसडीएम ने लोगों की समस्याएं सुन उन्हें चौकसी बरतने के साथ सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की हिदायत दी। उन्होंने बाढ़ राहत चौकियों समेत बाढ़ संभावित गांवों की निगरानी में कोई भी लापरवाही सामने आने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

उनका कहना है कि जलभराव के बाद संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सेहत महकमे समेत पशु चिकित्सा विभाग को भी सतर्क रहने की हिदायत दी गई हैं।

टिहरी डैम और बिजनौर बैराज से फिर पानी छोड़े जाने से खादर के गांवों में खलबली मच गई है। सिंचाई महकमे के कंट्रोल रूम के सूत्रों ने बताया कि पहाड़ों के साथ मैदानी इलाकों में मूसलधार बारिश होने से टिहरी डैम में पानी तेजी से बढ़ रहा।

इसके चलते शनिवार रात को हरिद्वार से 1.69 लाख 725 और बिजनौर बैराज से 1.15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रविवार देर रात तक पानी ब्रजघाट पहुंचने की संभावना है। इसके चलते गंगा के जलस्तर में और बढ़ोतरी होनी तय है।
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