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मेला शासकीय उपेक्षा का शिकार

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गढ़मुक्तेश्वर। लाख दावों के बाद भी उत्तरी भारत के मिनी कुंभ कहलाए जाने वाला गढ़ खादर के पौराणिक कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला शासकीय उपेक्षक्षा का शिकार है। आयोजन में सरकारी इमदाद मिलना तो दूर प्रदेश के मेला मानचित्र में मुकम्मल स्थान तक नहीं मिल पाया। आलम यह है कि स्थानीय स्तर पर आयोजन में मनमानी जिला पंचायत कर रहा है और दिक्कतें श्रद्धालुओं को उठानी पड़ती है।
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कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा किनारे लगने वाले इस मेले में प्रतिवर्ष 25 से लेकर 30 लाख श्रद्धालुओं का आगमन होता है। चतुर्दशी की रात में दिवंगत परिजनों की आत्मा शांति और उनकी मुक्ति के लिए दीपदान किया जाता है, जो मेले का सबसे प्रमुख अनुष्ठान माना जाता है। पूर्णिमा पर गंगा में डुबकी लगाकर श्रद्धालु घर लौट जाते हैं।

आश्वासन चार मंत्रियों का नतीजा सिफर
जिला पंचायत चेयरमैन सुनीता यादव ने गत वर्ष मेला उद्घाटन के दौरान दावा किया था कि आगामी वर्ष में मेले को शासन से अनुदान दिलाने के साथ ही प्रदेश के मेला मानचित्र में स्थान भी दिलाया जाएगा। इसके अलावा काबीना मंत्री बलराम यादव, शाहिद मंजूर और महबूब अली, राज्यमंत्री कमाल अख्तर तथा बदायूं से सांसद सपा सुप्रीमो के भतीजे धर्मेन्द्र यादव ने भी मेला आयोजन में शासन से अनुदान और प्रदेश मेला मानचित्र में स्थान दिलाने का भरोसा दिलाया था लेकिन अभी तक शासन से कवायद नहीं की गई।
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मेले के इतिहास, धार्मिक महत्ता, यहां आने वाले भक्तों की संख्या मिलने वाली सुविधाओं का खाका तैयार कर जिला प्रशासन को भेजा हुआ है।
-शमशाद हुसैन, मेलाधिकारी
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