गन्ना समिति के खाद केंद्रों पर उर्वरकों का टोटा
हापुड़। गन्ना समिति के खाद केंद्रों पर उर्वरक नहीं हैं। ऐसे में हजारों किसानों को डीएपी, यूरिया के लिए भटकना पड़ रहा है। सिंभावली गन्ना समिति के अधीन आने वाले कई खाद केंद्र तो बीते डेढ़ महीने से बंद पड़े हैं। इस अव्यवस्था से जिले में आलू की बुआई प्रभावित हो रही है। शिकायतों के बाद भी अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों में काफी गुस्सा है।
गन्ना समितियों के खाद केंद्रों से किसानों को उधार में उर्वरक दिया जाता है। इस उर्वरक का पैसा किसानों के गन्ना भुगतान में ब्याज के साथ समायोजित कर दिया जाता है। ऐसे में किसान पैसों की तंगी के चलते इन केंद्रों से उधार में उर्वरक खरीदते हैं, लेकिन गन्ना समिति के अफसरों की अनदेखी के चलते सिंभावली गन्ना समिति के अधीन आने वाले आठ खाद केंद्रों पर बीते डेढ़ महीने से उर्वरक नहीं हैं। आलम यह है कि कई केंद्रों पर तो ताला लटका है। आलू बुआई की तैयारी में लगे किसान इन केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन ताला लटका मिलने से उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि किसान कई बार संबंधित अफसरों को जानकारी दे चुके हैं, लेकिन राहत का कोई प्रयास नहीं किया गया है। गन्ना भुगतान न मिलने के कारण किसान नकद राशि पर बाजारों से उर्वरक खरीदने में भी असमर्थ हैं। ऐसे में फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
साहूकारों का शिकार हो रहे किसान
किसानों को गन्ना भुगतान नहीं मिल सका है, ऐसे में उनके पास उर्वरक खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं। इस मौके का फायदा उठाने के लिए गांवों में साहूकार सक्रिय हो गए हैं, जो मजबूर किसानों को उच्च दरों के ब्याज पर पैसा बांट रहे हैं।
ब्याज के साथ उर्वरक का पैसा काटते हैं खाद केंद्र
गन्ना समिति के खाद केंद्रों से किसान उधार में जो उर्वरक खरीदते हैं, उसका भुगतान किसानों के गन्ना भुगतान से ब्याज के साथ वसूला जाता है। फिर भी किसानों को उर्वरक उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
क्या कहते हैं किसान
गांव रसूलपुर निवासी किसान जतिन चौधरी ने बताया कि कुचेसर चौपला स्थित गन्ना समिति के खाद केंद्र पर बीते डेढ़ महीने से ताला लटका हुआ है। उर्वरक नहीं मिलने से वह आलू की बुआई नहीं कर पा रहे हैं।
गांव फतहपुर निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि गन्ना भुगतान नहीं मिल सका है, ऐसे में बाजार से उर्वरक खरीदना मुश्किल हो रहा है। गन्ना समिति के खाद केंद्र से उर्वरक नहीं मिल रहा है।
किसान समरपाल सिंह का कहना है कि गन्ना भुगतान न होने से पहले ही आर्थिक तंगी में फंसे हैं। ऐसे में डेढ़ महीने से खाद केंद्रों से उर्वरक नहीं मिल पा रहा है। आलू की बुआई प्रभावित हो गई है, अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
कोट
ऊपर से ही उर्वरक की उपलब्धता नहीं हो पा रही थी। इसके चलते यह समस्या बनी। अब खाद का स्टॉक मिला है। जल्द ही किसानों को उपलब्ध करा दिया जाएगा।
- राजीव सेठ, सिंभावली गन्ना समिति के सचिव