लाडले की हट कहीं उसकी सेहत न बिगाड़ दे
गढ़मुक्तेश्वर। गर्मी के मौसम की शुरूआत होते ही गली मोहल्लों से लेकर स्कूल कॉलेजों के गेट समेत बस और रेलवे स्टेशनों के आसपास ठेलियां घूमने लगी हैं। इन पर बिक रहीं आइसक्रीम की आवाज सुनते ही बच्चे बेतहाशा उस तरफ दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे हैं। बाल हठ के आगे परिजन भी बेबस होकर अपने लाडलों को आइसक्रीम दिलाने को मजबूर हो जाते हैं।
लाड़ प्यार में परिजनों को इस ओर भी ध्यान देना होगा कि कहीं जिद पूरी कराने को दिलाई गई आइसक्रीम उनके बच्चों को बीमार न कर डाले। क्योंकि अधिकांश फैक्ट्रियों में बनाई जा रहीं आइसक्रीम में दूषित पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा मीठे के रूप में सेक्रीन और बच्चों को आकर्षित करने के लिए भड़कीले रंगों का धड़ल्ले के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है जो सेहत के लिए काफी हानिकारक हैं। इसके बाद भी खाद्य सुरक्षा और सेहत विभाग इस तरफ से आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।
क्या कहते हैं चिकित्सक
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती का कहना है कि दूषित पानी से तैयार होने वाली आइसक्रीम बच्चों में बीमारी परोसने का काम करती हैं। इनमें लगाए जाने वाले भड़कीले रंग और सेक्रीन भी सेहत के लिए काफी घातक होती है।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी पवन कुमार का कहना है कि घटिया किस्म की आइसक्रीम बेचने वालों की धरपकड़ कर नमूने लेकर जांच को भिजवाए जाएंगे।