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आलू पर चटकी से फुटकर विक्रेताओं की लाटरी

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आलू पर चटकी से फुटकर विक्रेताओं की लाटरी
हापुड़। आलू पर चटकी आते ही फुटकर सब्जी विक्रेताओं की मानो लाटरी लग गयी है क्योंकि सब्जी विक्रेता 25 से 30 रुपये किलो तक आलू बेच रहे है। जबकि इस चटकी का ज्यादा लाभ किसानों को नहीं होगा क्योंकि अधिकांश किसानों ने पहले ही अपना आलू कारोबारियों को या मंडियों में ले जाकर बेच दिया है। मंडी में आलू का कट्टा 950 रुपये तक बिक रहा है।
हापुड़ जिले में आलू की खेती काफी बड़े क्षेत्रफल में होती है। यही कारण है कि जिले में एक दर्जन से ज्यादा शीतगृह हैं जिनमें हर साल लगभग 28 लाख कट्टा आलू रखा जाता है। इनमें आलू का भंडारण होने के बाद से पिछले महीने तक आलू का रेट 500 से 600 रुपये प्रति कट्टा चलता रहा। लेकिन अब जाकर आलू में थोड़ी चटकी आयी है।
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सब्जी के आढ़ती ब्रिजेश त्यागी का कहना है कि मंडी में 3797 और चिपसोना आलू का रेट 800 से 950 रुपये है जबकि शीतगृहों में आलू का रेट 700 से 850 रुपये प्रति कट्टा है। एक कट्टा में 50 किलो आलू निकलता है।
आलू व्यापार संघ के अध्यक्ष अनिल गुप्ता का कहना है कि आलू में पहले से चटकी आयी है लेकिन ऐेसा नहीं है कि आलू की कोई कमी है। उनका दावा है कि हापुड़ जिले के शीतगृहों में अभी भी करीब 6 लाख कट्टा आलू रखा है। जबकि नवंबर के प्रथम सप्ताह में पंजाब का नया आलू दिल्ली की सब्जी मंडी में पहुंचने की उम्मीद है।
आलू उत्पादक किसानों का कहना है कि उन्हें तमाम तरह की लागत लगाने के बाद भी आलू का रेट बहुत कम मिल सका है। लेकिन फुटकर विक्रेता उपभोक्ताओं के साथ अन्याय कर रहे हैं। क्योंकि अगर 900 रुपये का कट्टा खरीदकर उस पर खर्चा 100 रुपये खर्चा मान लिया जाए तो भी 1000 रुपये प्रति कट्टा पड़ता है।
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एक कट्टे में 50 किलो आलू निकलता है। इससे साफ है कि 20 रुपये किलो खरीदा आलू 30 रुपये किलो बेचा जा रहा है और जिला प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सैय्यद अयाजुद्दीन ने जिलाधिकारी से मांग की है कि वह जिला आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करें कि शीतगृहों से आलू खरीदकर शहर के तीन चार प्रमुख स्थानों पर बिना लाभ हानि के आलू की बिक्री कराएं। इससे आम गरीब जनता को लाभ होगा।
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