जिले में लो वोल्टेज की मार, विद्युत उपकरण बने शोपीस
हापुड़। जिले में लो वोल्टेज के चलते विद्युत उपकरण शोपीस बन रहे हैं। नलकूप पानी नहीं उगल रहे, जिससे फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। भीषण गर्मी में बिजली की इस अव्यवस्था से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मियां शुरू होने से पहले बिजली निगम के अधिकारी जिले को बेहतर आपूर्ति देने के संबंध में तैयारी पूरी होने का दावा कर रहे थे, लेकिन तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंचते ही यह दावे हवाई साबित होने लगे हैं। आलम यह है कि शहर, देहात में लो वोल्टेज के चलते विद्युत उपकरण सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कूलर, पंखे शोपीस बन रहे हैं। नलकूप भी ठप हैं। इसके अलावा बिजली की अघोषित कटौती भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं।
कोट
अधिशासी अभियंता पीके गौतम का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के चलते लॉ वोल्टेज की समस्या बन रही है। इस समस्या से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
धूप से मिली राहत, उमस ने निकाला पसीना
हापुड़। आसमान में छायी धुंध भी मंगलवार को गर्मी से राहत नहीं दिला पायी। दिनभर भयंकर उमस का प्रकोप जारी रहा। ऐसे में लोगों को घरों के अंदर भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बरसात के बाद ही गर्मी से लोगों को निजात मिल सकती है।
बीते कई दिन से चिलचिलाती धूप से लोग परेशान थे। मंगलवार को धूप से तो कुछ राहत मिली, लेकिन उमस से राहत नहीं मिल सकी। आसमान में छायी हल्की धुंध से बरसात की उम्मीद जगी, लेकिन मायूसी ही हाथ लगी। जिले का अधिकतम तापमान 40 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान भी 30 डिग्री रहा। बरसात ही लोगों को गर्मी से अब राहत दिला सकती है। वहीं, मानसून की देरी से धान की बुवाई भी प्रभावित हो रही है।
मौसम विशेषज्ञ मनोज आत्रे के अनुसार बुधवार को आसमान में बादल छा सकते हैं, जिनसे मौसम का अंदाज भी बदल सकता है। जल्द ही बरसात के आसार बन रहे हैं।
मौसमी बीमारियां बढ़ी
गढ़मुक्तेश्वर। आकाश में बादल न छाने से बारिश की आस पूरी नहीं हो पा रही, जिससे उमस भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप में पसीने छूट रहे हैं और गर्मी के मौसम से जुड़ीं बीमारी भी पांव पसार रही हैं। लोगों को उमस भरी गर्मी, मच्छरों का प्रकोप और चिलचिलाती धूप का कहर झेलना पड़ रहा है। बारिश की बेरुखी और गर्मी का प्रकोप बढ़ने से वायरल फीवर, आई फ्लू, डायरिया जैसी गर्मी से जुड़ीं बीमारी भी पांव पसार रही हैं। बारिश न होने से जंगल में खड़ी लहलहाती फसलों में भी काफी नुकसान हो रहा है।