फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदरखा कट न खुलने से हादसे हो रहे

विज्ञापन
विज्ञापन
बाइक को बचाने में कार और कैंटर में भिड़ंत, पांच घायल
विज्ञापन


गढ़मुक्तेश्वर। बंद चल रहा बदरखा कट न खुलने पर लंबा फेर काटने की बजाए हाइवे का डिवाइडर पार कर रही बाइक को बचाने की कोशिश में कार और केंटर की भिड़ंत होने से पांच लोग घायल हो गए, जिन्हें ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया।
दिल्ली लखनऊ नेशनल हाइवे पर गढ़ क्षेत्र के गांव बदरखा के सामने वाला अधिकृत कट बंद होना हादसों की बड़ी वजह साबित हो रहा है। गढ़ में आने जाने के दौरान उल्टी दिशा से होकर करीब पौन किलोमीटर लंबा फेर काटने की बजाए अधिकांश बाइक वाले डिवाइडर को पार करना समय की बचत मानते हैं। रविवार की दोपहर में बंद कट के पास एक युवक बाइक को डिवाइडर पार करा रहा था। इस दौरान तेज रफ्तार में सिंभावली की तरफ जा रही आ रही एक कार के चालक द्वारा बाइक को बचाने की कोशिश में ब्रेक लेने पर कार अनियंत्रित हो गई, जिसमें पीछे से जा रही कैंटर ने टक्कर मार दी। इस हादसे में ममता, पिंकी, कार चालक राजपाल निवासी रामपुर समेत केंटर चालक जयवीर और क्लीनर राजू निवासी अमरोहा घायल हो गए, जिन्हें सूचना पर पहुंचे एसएसआई सुरेंद्र सिंह ने ग्रामीणों की मदद से स्थानीय अस्पताल में भर्ती करा दिया।
विज्ञापन


चार सप्ताह पहले डिवाइडर पार करने के दौरान पूरे परिवार की हो चुकी है मौत : दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे के सफर को जाम और दुर्घटना रहित बनाने के मकसद से एनएचएआई ने चौड़ीकरण कराने के साथ ही किनारे पर बसे गांव और कस्बों में फ्लाईओवर का निर्माण कराया था। जिन गांवों के सामने फ्लाई ओवर बनाए जाने मुमकिन नहीं हो पाए थे, वहां के ग्रामीणों के आवागमन को कट छोड़े गए थे। गढ़ के गांव बदरखा के सामने छोड़े गए कट को अहतियात के तौर पर कार्तिक मेले के दौरान नवंबर में बंद कर दिया गया था, जिससे बदरखा समेत आसपास में बसे बिहूनी और करीमपुर गांव के ग्रामीणों को गढ़ आने जाने के दौरान करीब दोनों तरफ से एक किलोमीटर उल्टी दिशा में आना जाना पड़ता है। कट बंद होने के बाद से गांव बदरखा के सामने छोटे बड़े हादसे होते आ रहे हैं, जिनमें महिला बच्चों समेत दर्जनों राहगीरों के घायल होने के साथ ही 20 मई को सिंभावली क्षेत्र के गांव मुरादपुर के हसरत, उसकी पत्नी राजदा और संतान न होने पर देवरानी से गोद लिए गए चार माह के दुधमुंहे बच्चे बिलाल की मौत होने से पूरा परिवार ही खत्म हो गया था।
विज्ञापन


कोट
एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी का कहना है कि पिछले दिनों एनएचएआई समेत संभागीय परिवहन अफसरों के साथ बंद चल रहे बदरखा कट की जांच-पड़ताल की गई थी। ग्रामीणों को ही रही दिक्कत और हादसों का उल्लेख करते हुए बंट कट को खुलवाने की संस्तुति के साथ जिला प्रशासन को अब दोबारा रिपोर्ट भिजवाई जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें