हापुड़ के कोचिंग सेंटरों में भी हो सकता है सूरत जैसा हादसा
हापुड़। जिले की तंग गली, मोहल्लों में मानकों को ताक पर रख चलाए जा रहे कोचिंग सेंटरों में आग से बचाव के संशाधन उपलब्ध नहीं हैं, कभी भी यहां सूरत जैसा अग्निकांड हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि 50 से अधिक सेंटर बिना मान्यता के ही चल रहे हैं, जिनमें आग से बचाव के साधनों का कोई इंतजाम नहीं है। बहरहाल, सूरत अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन की नींद खुली है, डीआईओएस ने सेंटर संचालकों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
जिले में करीब 100 कोचिंग सेंटर संचालित हैं। अधिकांश संचालकों ने छात्रों की संख्या रिकॉर्ड में काफी कम दर्शायी है। आलम यह है कि कोचिंग कक्ष में छात्रों की संख्या इतनी अधिक होती है कि वहां बैठ पाना भी मुश्किल हो जाता है।
अधिकांश कोचिंग सेंटर तंग गली, मोहल्लों व बिल्डिंगों के ऊपरी तलों पर स्थित हैं। इन केंद्रों पर छात्रों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। आश्चर्य की बात यह है कि आग पर काबू पाने के लिए संयंत्र तो दूर, छोटे अग्निशमन सिलेंडर तक मौजूद नहीं हैं।
डीआईओएस कार्यालय में जितने कोचिंग सेंटर मान्यता प्राप्त है, उससे कहीं अधिक सेंटर बिना मान्यता के ही चलाए जा रहे हैं, जो छात्रों से सिार्फ पैसा कमा रहे हैं। पढ़ाई और सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की जा रही है। बहरहाल, सूरत के एक कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद डीआईओएस ने सभी कोचिंग सेंटर संचालकों को नोटिस जारी कर, कोचिंग कक्ष में अग्निशमन यंत्र रखने, अस्थाई छत जो फाइबर, प्लास्टिक से बनी हो उन्हें हटाकर स्थाई छत बनाने के निर्देश दिए हैं।
-10 जून से चलेगा अभियान-
जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र सिंह ने बताया कि 10 जून से अभियान चलाकर कोचिंग सेंटरों की जांच की जाएगी। जांच में अग्निशमन यंत्र न मिलने व अन्य व्यवस्थाओं का अभाव मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है।
स्कूलों को भी जारी किए निर्देश
सूरत में कोचिंग सैंटर में लगी आग से 20 छात्रों की जान जाने के बाद जिला प्रशासन की नींद खुल गई है। स्कूलों को भी कड़े दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसमें मुख्य दिशा निर्देश यह हैं।
* फाइबर, ज्वलनशील पदार्थों से बनी विद्यालयों की छत को हटाकर पक्की छत बनायी जाए।
* विद्यालयों में अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था की जाए।
* विद्यालयों का भवन भूकंपरोधी होना चाहिए।
* एनबीसी प्रमाण पत्र होना जरूरी।
* विद्यालय में विद्युत कनेक्शन लोड के हिसाब से लिया जाए।