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अब 6 महीने में स्वस्थ्य होंगे टीबी के मरीज

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अब छह माह में स्वस्थ होंगे टीबी के मरीज
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-जिला स्तर पर टास्क फोर्स कमेटी का गठन
-प्रत्येक महीने शासन स्तर से होगी मानीटरिंग
जतिन त्यागी
हापुड़। क्षय रोग (टीबी) के मरीज अब मात्र छह महीने में स्वस्थ हो सकेंगे। केंद्र सरकार की ओर से आरएनटीसीपी कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण दवाओं को शामिल किया गया है जिससे मरीजों को अधिक लाभ मिलेगा। इसके तहत हापुड़ सहित 75 जिलों में जिला स्तरीय टास्क फोर्स कमेटी का भी गठन किया गया है। प्रत्येक महीने शासन से पूरे कार्यक्रम की मानीटरिंग की जाएगी।
केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त किए जाने की कवायद शुरू की गई है। अभी तक जिस मरीज को टीबी रोग हो जाता था, वह कई साल के लंबे इलाज के बाद ठीक हो पाता था। दवाओं का नियमित इस्तेमाल न करने पर कई बार मरीज एमडीआर और एक्सडीआर श्रेणी में पहुंच जाता था। इस समस्या से निजात पाने को अब सरकार ने टीबी के इलाज के लिए दो कारगर दवाओं को शामिल किया है। इसके वैक्सीनेशन की भी तैयारी की जा रही है। टीबी के नए इलाज से मरीज महज छह महीने के अंदर पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे। सरकार का सपना साकार करने के लिए डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स कमेटी का भी गठन हो चुका है। यह कमेटी हापुड़ समेत प्रदेश के 75 जिलों में गठित हुई है। कमेटी के अध्यक्ष डीएम हैं, जबकि नोडल डिप्टी सीएमओ डा.राकेश अनुरागी को बनाया गया है।
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इन दवाओं को किया गया है शामिल
डॉट्स के तहत अभी तक टीबी के मरीजों को उपचार के लिए 15 दवाएं खिलाई जाती थीं। इससे ठीक होने में मरीजों को करीब दो साल लग जाते थे, लेकिन अब सरकार ने आरएनटीसीपी कार्यक्रम में बेडाक्यूलिन और डिलामिंड दवा को शामिल कर लिया है।
एमडीआर के मरीज नौ महीने में होंगे स्वस्थ्य
टीबी के आरएनटीसीपी कार्यक्रम में दो नई दवाओं को शामिल किए जाने के बाद अब टीबी के सामान्य मरीज महज पांच और एक्सडीआर श्रेणी में पहुंच चुके मरीज नौ महीने में पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।
जल्द शुरू होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम-
- आरएनटीसीपी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जल्द ही प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों को शासन से मिली गाइड लाइन के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो मरीजों को बेहतर इलाज दे सकेंगे।
घर घर जाकर होगी टीबी के मरीजों की पहचान-
- आरएनअीसीपी कार्यक्रम के तहत अब शहर, देहात में घर घर जाकर टीबी के मरीजों की पहचान की जाएगी। संदिग्ध मरीजों को जांच के बाद बेहतर उपचार दिया जा सकेगा।
अस्पताल, मेडिकल स्टोर रखेंगे ब्योरा, मरीजों की पहचान छिपाना पड़ेगा भारी-
- निजी अस्पताल, मेडिकल स्टोर संचालकों को टीबी के मरीजों का पूरा ब्योरा रखना होगा। मरीजों की पहचान छिपाने वालों पर कठोर कार्रवाई होगी। यहां तक की लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
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-जिले में टीबी रोगियों का बढ़ता ग्राफ-
वर्ष मरीजों की संख्या
2014-15 2100
2015-16 2400
2016-17 2923
डिप्टी सीएमओ व टीबी प्रभारी डा. राकेश अनुरागी का कहना है कि सरकार ने आरएनटीसीपी कार्यक्रम में दो मुख्य दवाओं को शामिल किया है। टास्क फोर्स कमेटी की गठन हो चुका है। अब टीबी के मरीज अधिकतम छह महीने में स्वस्थ हो सकेंगे।
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