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हवा में कट गई लाखों रुपये की पतंग

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जिले के पतंगबाजों ने आसमान में उड़ा दिए 11 लाख
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- रक्षाबंधन पर शहर में जमकर हुई पतंगबाजी, रंग बिरंगा हुआ आसमान
- चाईनीज मांझे पर रहा प्रतिबंध, स्वदेशी एमएमएस मांझे की रही धूम
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। रक्षाबंधन पर जिले में दिन भर बच्चों व बड़ों ने जमकर पतंगबाजी की। शाम के समय आसमान में हर ओर रंग बिरंगी पतंग दिख रही थी। इस बार जिले में पतंग का कारोबार करने वालों की माने तो जिले में करीब 11 लाख रुपये के पतंग का कारोबार हुआ। हापुड़ में सात लाख की पतंगबाजी हुई। वहीं, गढ़ में दो लाख के पतंग आसमान में उड़ गए। जबकि पिलखुवा में 1.50 लाख के पतंग का कारोबार हुआ। इसी तरह धौलाना में 50 हजार रुपये के लोगों ने पतंग उड़ा दी।
रक्षाबंधन पर्व पर शहर में पतंगबाजी का पुराना शौक है। इस कारण पतंग उड़ाने की तैयारी बच्चों के साथ साथ बड़ों ने भी पहले से ही कर रखी थी। लेकिन इस बार प्रशासन की सख्ती के कारण चाइनीज मांझे की ब्रिकी पर प्रतिबंध रहा, इसके स्थान पर स्वदेशी मांझा एमएमएस की धूम रही।
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सोमवार सुबह से ही शहर में पतंगबाजी शुरू हो गई, लेकिन दोपहर में बारिश के कारण करीब एक घंटा के लिए पतंगबाजी रूक गई। जिसके बाद आकाश में चारों ओर रंग बिरंगी पतंग दिखाई देने लगी। शाम को लगभग हर छत पर बच्चे अपने परिजनों के साथ पतंगबाजी करते नजर आये।
पतंगबाजी के शौकीन लोग छतों पर म्यूजिक सिस्टम लगा रखे थे और गानों की धुन के साथ पतंग बाजी कर रहे थे। छोटे छोटे बच्चे पतंग के कटते ही उन्हें उठाने के लिए दिन भर दौड़ते रहे। जिन युवकों की पतंग और मांझा कट जाता, वही दुकानों की ओर चल देते। शाम होते होते अधिकांश दुकानों पर पतंग और मांझा समाप्त हो गया।
पतंग की दुकान करने वाले इंद्रजीत ने बताया कि जिले में इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर पतंग व मांझे का करीब 11 लाख रुपये का कारोबार हुआ। हालांकि इस बार पिछली बार से कम बिक्री हुई। पिछली बार शहर में करीब नौ लाख रुपये की पतंग और मांझे की बिक्री हुई थी।
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दुकानदार शिवम ने बताया कि प्रशासन की सख्ती और लोगों की समस्याओं को देखते हुए बार चाईनीज मांझे की बिक्री नहीं हुई। इस बार स्वदेशी एमएमएस और नन्हें मांझे की ही धूम रही।
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