हमीरपुर। जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गरीब परिवार की महिलाओं को तंगी से उबारने के लिए समूह का गठन किया गया। करोड़ों रुपये सरकारी धन खर्च हुआ। मगर आत्मनिर्भरता की कवायद कागजों में सिमटकर रह गई हैं। इनमें एक हजार से अधिक समूह या तो घाटे में हैं या फिर निष्क्रिय पड़े हैं।
जिले में करीब 7,500 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इनमें करीब 80 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। इन समूहों को वजूद में लाने के लिए रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि के तौर पर करोड़ों रुपये जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद 1,000 समूह नुकसान में हैं। जो सालों से निष्क्रिय हैं। विभाग द्वारा इनको रोजगारपरक बनाए जाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
जिला मिशन प्रबंधक प्रशांत मिश्रा ने बताया कि एक हजार समूह निष्क्रिय हैं। इन्हें सक्रिय करने की कवायद की जा रही है। विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ फंड उपलब्ध कराने तक है। महिलाओं के कामकाज में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते। रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि के आधार पर हानि व लाभ का मूल्यांकन किया जाता है।