अन्नदाताओं पर इस बार दोहरी मार पड़ी है। सूखे से बेहाल किसानों को मौदहा बांध ने भी दगा दे दिया। जून में इसके फाटक की मरम्मत के नाम पर पानी छोड़ा गया था। अब हाल ये है कि बारिश न होने से बांध डेड पड़ा है। किसानों को पलेवा की चिंता सता रही है। वहीं संबंधित अधिकारी पहली बार ऐसी स्थिति होने की बात कह रहे हैं।
मौदहा बांध छानी गांव के निकट 17 जून 1999 में चालू हुआ। ये 20 किमी के दायरे में फैला है। इसका पानी मौदहा तहसील सहित सुमेरपुर ब्लाक के गांवों को दिया जाता है। जिले में इससे 101 टेल निकलती हैं। वहीं महोबा के 12 गांवों में भी इससे पानी जाता है। इसके जर्जर हो रहे फाटकों की जांच आईआईटी रुढ़की की टीम ने की। इसके बाद जून में इसके फाटक खोल दिए गए।
पानी निकलने के बाद फाटकों की मरम्मत हुई, लेकिन जुलाई के बाद बारिश न होने से बांध नहीं भर पाया। हर साल इस बांध से अक्टूबर के अंतिम या नवंबर के पहले सप्ताह में पलेवा के लिए पानी छोड़ा जाता था। अब बांध में पानी न होने से सभी किसान पलेवा के लिए परेशान हैं। उन्हें इसकी चिंता सता रही है कि गेहूं और दलहनी फसलों की बुआई कैसे होगी।