हमीरपुर। भाजपा ने 2017 के आम चुनावों में लंबी छलांग लगाई। दोनों सीटों पर कब्जा कर लिया। इस बार भाजपा, सपा सहित अन्य दलों के बीच कड़ा संघर्ष है। मतदाताओं की थाह दलों को नहीं मिल पा रही है। इससे मुकाबला रोमांचक हो गया है।
सदर विधानसभा में 2017 में भाजपा प्रत्याशी रहे अशोक चंदेल ने 44.04 फीसदी वोट पाकर जीत हासिल की थी। इस बार पार्टी नेतृत्व ने सपा के बागी डॉ. मनोज प्रजापति को मैदान में उतारा है। इस सीट पर बसपा से रामफूल निषाद चुनाव मैदान में हैं।
मौजूदा समय में फतेहपुर की सांसद केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का इस विधानसभा से पुराना रिश्ता है। निषाद बिरादरी से साध्वी ताल्लुक रखतीं हैं। चुनाव में मतदाताओं के बीच जनसभा करने सिर्फ एक बार ही आईं हैं।
वह विधानसभा क्षेत्र में तो नहीं आ सकीं लेकिन मोबाइल के जरिए भाजपा को जिताने की अपील अवश्य कह रही हैं। सपा प्रत्याशी के पक्ष में हवा बनाने में स्थानीय नेता लगे हैं।
कांग्रेस में पूर्व विधायक अशोक चंदेल की पत्नी राजकुमारी भी मैदान में हैं। वह पति के सहारे मतदाताओं के बीच अपनी जगह बनाने में जुटी हैं।
राठ विधानसभा सीट (सुरक्षित) होने से पहले वर्ष 2008 तक हमेशा लोधी बिरादरी का ही प्रत्याशी चुनाव जीतता आया है। इस बार चुनाव में दो पूर्व मंत्रियों में भाजपा से चौधरी राजेंद्र सिंह लोधी और सपा से पूर्वमंत्री चौधरी ध्रुराम लोधी ने अपनी प्रतिष्ठा लगा दी है।
इन नेताओं के कमर कस लेने से लोधी मतदाता उहापोह में हैं। ध्रुराम लोधी राठ विधानसभा से तीन बार विधायक रह चुके हैं। 1994 में वह प्रदेश में बसपा सरकार में पंचायतीराज एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री रह चुके हैं।
वहीं 1989 में जनता दल से विधायक रह चुके चौधरी राजेंद्र सिंह भी प्रदेश सरकार में पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं। सपा प्रत्याशी को जिताने में कभी सपा सरकार में पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष रहे रामाधार सिंह भी एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं।
फिलहाल कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।