कबरई (महोबा)। बुंदेली लोक संस्कृति में रची-बसी महामुलिया की परंपरा के साथ शनिवार को पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पितृपक्ष में बच्चियाें ने एक पखवाड़े तक कांटों की झाड़ियों में रंग-बिरंगे फूल सजाकर लोकगीत गाए। पितृ विसर्जन के दिन महामुलिया को आकर्षक झांकियों से सजाकर बैंड-बाजे के साथ तालाब में विसर्जित किया।
कस्बा कबरई के राजेंद्रनगर में मानसी, तन्नो, निष्ठा, शुभ, अंशू, पूर्ति, कोमल, यशी, वैष्णवी, नैना, अर्चना समेत अन्य बच्चियों ने उत्साह के साथ आयोजन में भाग लिया। महामुलिया को सजाकर निकाली गई झांकियों के दौरान लोकगीतों व संगीत से माहौल उत्सवी हो गया। यह परंपरा पितरों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का प्रतीक होने के साथ नई पीढ़ी को बुंदेली लोक संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी है। पीढ़ियों से चली आ रही इस लोकरीति के जरिए बच्चियां पारंपरिक गीतों, रीति-रिवाजों व सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।