हमीरपुर। फार्मर रजिस्ट्री के काम में नाम ही रोड़ा अटका रहा है। सभी दस्तावेज में एक जैसा नाम न होने से डाटा फीडिंग नहीं हो पा रही है। इससे किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। शासन ने 31 मार्च तक सभी किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन 50 फीसदी से ज्यादा किसानों के साथ नाम में भिन्नता की समस्या आ रही है। इससे सम्मान निधि न मिल पाने की आशंका से परेशान हैं।
जिले में दो लाख एक हजार 711 फार्मर रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य है। इनमें खतौनी, आधार नंबर, पंजीकृत मोबाइल नंबर व बैंक खाता नंबर की फीडिंग करनी है। डाटा फीडिंग के दौरान सभी कागजों में नाम की एकरूपता नहीं मिल रही है। किसी कागज में नाम के आगे टाइटल लगा है तो किसी में छूटा है। नाम के अक्षर भी इधर-उधर मिल रहे हैं। सर्वाधिक दिक्कत खतौनी में दर्ज नाम व आधार और बैंक खाते लिखे नाम में अंतर मिलने से हो रही है। राजस्व परिषद से मिली खतौनी में से अधिकांश किसानों का डाटा रियल टाइम खतौनी से लिंक न होने से भी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
किसान के आधार कार्ड व खतौनी में नाम, पिता का नाम व संबंध में भिन्नता होने पर लेखपाल के पोर्टल से सत्यापन नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते अब तक मात्र 91582 फार्मर रजिस्ट्री बन सकी हैं। जो कुल प्रतिशत का 45.40 फीसदी है।
नाम गलत तो खतौनी में कराना होगा संशोधन
-कुछ किसान ऐसे हैं, जिनकी खतौनी में नाम गलत है। ऐसे में उन्हें खतौनी में संशोधन कराना पड़ेगा। खतौनी पर दर्ज नाम में यदि संशोधन कराना है तो एसडीएम न्यायालय में वाद दायर करना होगा। न्यायालय के आदेश के बाद ही खतौनी में दर्ज नाम संशोधित हो सकेगा। इस जटिल प्रक्रिया के चलते किसानों को आशंका है कि 31 मार्च तक फार्मर रजिस्ट्री हो पाना मुश्किल है।
एक लाख 10 हजार 129 किसानों की अटकी फार्मर रजिस्ट्री
- जिले में दो लाख एक हजार 711 किसान हैं। इनमें अब तक 91 हजार 582 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो सकी है। राजस्व परिषद से मिली खतौनी से किसानों के नाम पते मैच न होने से दिक्कत आ रही है। नेट समस्या व पोर्टल बाधित होना भी मुख्य कारण बना हुआ है। हालांकि, समस्या दूर कराकर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कराने का प्रयास किया जा रहा है।
हरिशंकर भार्गव ,उप कृषि निदेशक