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Hamirpur News: विरमा-चंद्रावल उफनाईं...कहीं नाव तो कहीं ट्यूब बना सहारा

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- बेतवा 98.500 और यमुना 96.900 मीटर पर, बांधों से छोड़े जा रहे पानी से बढ़ रहा जलस्तर
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- विरमा के उफान से कनेरा टापू बना, 45 परिवारों का संपर्क कटा

- बिलगांव की मॉडल गौशाला में पानी घुसा, 340 मवेशियों की शिफ्टिंग मौदहा में सात रास्तों पर आवागमन रोका

फोटो 28 एचएएमपी 22- विरमा के पानी से चारों ओर से घिरा कनेरा मजरा। संवाद

फोटो 28 एचएएमपी 23- बाढ़ के पानी के बीच ट्रैक्टर के ट्यूब के सहारे खाद्य सामग्री ले जाते ग्रामीण। संवाद

फोटो 28 एचएएमपी 24- विरमा के पानी से घिरी बिलगांव की मॉडल गौशाला। संवाद

फोटो 28 एचएएमपी 25- बाढ़ के बीच गौशाला से मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाते ग्रामीण। संवाद

फोटो 28 एचएएमपी 26- चंद्रावल नदी के बढ़े पानी के बीच नाव से आवागमन करते ग्रामीण। संवाद

फोटो 28 एचएएमपी 27- जलभराव से प्रभावित कुरारा क्षेत्र का मार्ग। संवाद

संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में शुक्रवार को बारिश नहीं हुई, लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी का असर अब भी बना हुआ है। विरमा और चंद्रावल उफान पर हैं, नाले ओवर फ्लो होकर चल रहे है। हालात यह है कि रपटा पुल डूब गए हैं। ग्रामीण इलाकों का संपर्क टूट गया है। आवश्यक कार्य के लिए प्रशासन ने व ग्रामीणों ने नाव की व्यवस्था की है। हर ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। यमुना व बेतवा का जल स्तर तेजी के साथ बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।

शुक्रवार शाम छह बजे हमीरपुर में बेतवा का जलस्तर 98.500 मीटर और यमुना का 96.900 मीटर दर्ज किया गया। बेतवा का खतरे का निशान 104.54 और यमुना का 103.63 मीटर है। दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे हैं, लेकिन जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी है। शुक्रवार शाम चार बजे बेतवा नदी से जुड़े मौदहा बांध से 51,230 क्यूसेक, लहचूरा से 25,700 और माताटीला से 33,134 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। तीनों बांधों से कुल 1,10,064 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। यमुना में हथिनीकुंड बैराज से 1,334 और ओखला बैराज से 6,779 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है। मौदहा तहसील क्षेत्र में प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से कई मार्गों पर आवागमन रोककर वैकल्पिक रास्तों से यातायात डायवर्ट किया है।
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कनेरा में चार दिन से संपर्क कटा
सरीला। जलालपुर थाना क्षेत्र के कनेरा मजरे में विरमा नदी का पानी बढ़ने से करीब 45 परिवार चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार बृहस्पतिवार से बढ़ा पानी शुक्रवार रात तक पूरे मजरे को घेर चुका था। कुपरा और हसऊपर-रूरीपारा की ओर जाने वाले रास्ते भी जलमग्न हैं।कनेरा निवासी नारायणदास ने बताया कि नाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण ट्रैक्टर के ट्यूब में हवा भरकर बाढ़ का पानी पार कर रहे हैं। इसी के सहारे खाद्य सामग्री और सब्जियां लेकर गांव आ-जा रहे हैं। पुन्ना और पुरन के अनुसार गांव में आटा खत्म हो गया है। जरूरी सामान नहीं पहुंच पा रहा है। ईंधन भीग जाने से खाना बनाने में परेशानी है। बिजली के खंभे और तार पानी में डूबने से चार दिन से बिजली आपूर्ति बंद है। मोबाइल नेटवर्क अभी काम कर रहा है। नारायणदास के अनुसार वर्ष 1978 की बाढ़ के दौरान प्रशासन ने तीन नावें उपलब्ध कराई थीं, लेकिन समय के साथ वे टूट गईं। इसके बाद गांव में दोबारा नाव उपलब्ध नहीं कराई गई। ग्रामीणों ने तत्काल नाव की व्यवस्था कराने की मांग की है।
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वर्ष 2013 के बाद विरमा ने दिखाया उग्र रूप

बाढ़ का पानी खेतों में भरने से ग्रामीणों के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक फसल जलमग्न है। उन्होंने नुकसान 80 प्रतिशत तक होने का अनुमान जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2013 के बाद इस बार विरमा में इतना अधिक पानी आया है।


बिलगांव की मॉडल गौशाला बनी टापू
सरीला। जलालपुर थाना क्षेत्र के बिलगांव में विरमा नदी का पानी वर्ष 2021 में मनरेगा से बनी मॉडल गौशाला में भर गया है। चारों तरफ पानी से घिरने के कारण गौशाला टापू में तब्दील हो गई है। ग्राम प्रधान रामपाल राजपूत के अनुसार गौशाला में करीब 400 मवेशी हैं। इनमें से 340 को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है। गौशाला तक पहुंचने वाले दोनों रास्ते डूब गए हैं। ग्राम पंचायत की ओर से जेसीबी से टीले को काटकर वैकल्पिक रास्ता बनाया जा रहा है। मवेशियों की देखभाल के लिए करीब 20 लोग लगाए गए हैं। प्रधान के अनुसार गौशाला में करीब 2000 कुंतल भूसा रखा था। इसमें से 400 कुंतल से अधिक भूसा बाढ़ में बह गया। पानी और भूसे के दबाव से एक टिन शेड भी धंस गया।


सात मार्गों पर रोका गया आवागमन

मौदहा। वर्षा और बांधों से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण तहसील क्षेत्र की चंद्रावल और नालों का जलस्तर बढ़ा है। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से सात स्थानों पर आवागमन रोककर जरूरत के अनुसार वैकल्पिक मार्गों से यातायात डायवर्ट किया है।
शिवनी में मुस्करा-बिलगांव मार्ग पर विरमा नदी का पानी बढ़ने से जलभराव है। बगिया का डेरा, रजवा का डेरा, धुनका का डेरा और नत्थूपाल का डेरा के निवासियों को बाबा गंगादास की कुटी, शिवनी में विस्थापित किया गया है। यहां ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो नावें चल रही हैं।
लरौंद में चकदहा-लरौंद मार्ग का रपटा जलमग्न होने से आवागमन रोका गया है और एक नाव संचालित की जा रही है। फत्तेपुरवा में श्याम नाले का पानी रपटे के ऊपर से बहने के कारण आवागमन करहिया मार्ग से डायवर्ट किया गया है। इचौली-खन्ना मार्ग पर भी श्याम नाले का पानी रपटे के ऊपर बहने से आवागमन रोक दिया गया है।
गुरदहा-उरदना मार्ग के रपटे पर चंद्रावल नदी का पानी भरने से आवागमन करहिया मार्ग से डायवर्ट किया गया है। हिमौली में सीहो नाले के जलभराव के कारण आवागमन रोककर जरूरत पड़ने पर ग्योड़ी मार्ग से डायवर्ट करने की व्यवस्था की गई है। पढ़ोरी के पास मौदहा-सिसोलर मार्ग का चंद्रावल नदी स्थित रपटा डूबने से आवागमन रोककर राहगीरों को सिसोलर-टिकरी मार्ग से भेजा जा रहा है।


नाव से पहुंचाई जा रही है मदद
प्रशासन की ओर से जलमग्न रपटों, नालों और नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन न करने की अपील की गई है। तहसीलदार रविंद्र पाल ने बताया कि बच्चों को नदी के पास जाने से रोकने के लिए गांवों में मुनादी कराई जा रही है। कनेरा में नाव के माध्यम से टीम भेजकर ग्रामीणों तक आवश्यक मदद पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।


कुरारा में जलभराव, रास्तों पर पानी
कुरारा। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद क्षेत्र के निचले इलाकों में जलभराव बना हुआ है। कई रास्तों और खेतों में पानी जमा है। शुक्रवार को बारिश नहीं होने से नए पानी की आवक नहीं हुई, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली है। हालांकि जलभराव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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मौदहा में दो नाव, लरौंद में एक

प्रशासन के अनुसार शिवनी में बाढ़ प्रभावित डेरों के लोगों की सुविधा के लिए दो नावें संचालित हैं। लरौंद में एक नाव लगाई गई है। प्रशासन ने जलमग्न रपटों और तेज बहाव वाले स्थानों पर आवागमन रोक दिया है।
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वैकल्पिक मार्ग से भेजे जा रहे लोग

मौदहा तहसील क्षेत्र में शिवनी, लरौंद, फत्तेपुरवा, इचौली, गुरदहा, हिमौली और पढ़ोरी के मार्ग प्रभावित हैं। कहीं रपटा डूबने, कहीं नाले का पानी ऊपर बहने और कहीं चंद्रावल नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण आवागमन रोका गया है। प्रशासन ने अलग-अलग स्थानों पर वैकल्पिक मार्ग तय किए हैं।
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