फोटो 28 एचएएमपी 33- सुमेरपुर में रोजा अफ़्तार करते रोजदार। संवाद
भरुआ सुमेरपुर। माहे मुबारक रमजान का दूसरा असरा शुरू हो गया है, जिसे मग़फिरत यानी अल्लाह की माफी का असरा कहा जाता है। इस पाक महीने के दूसरे असरे के आगमन के साथ ही मुस्लिम बस्तियों में इबादत, तिलावत और दुआओं का सिलसिला और तेज हो गया है।
इस अवसर पर मौलाना रियाजुल हसन ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद (सल्ल.) की हदीसों का विशेष महत्व बताया जा रहा है। हदीस के अनुसार, रमजान का पहला असरा रहमत है, दूसरा असरा मग़फिरत है और तीसरा असरा जहन्नम से निजात का है। इसी तरह एक अन्य हदीस में रोजे की अहमियत बताते हुए फरमाया गया है कि रोजा इंसान को सब्र, तकवा और गुनाहों से दूर रहने की सीख देता है।