राठ। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह किसान के मामले में हाईकोर्ट ने सीजेएम की अनुमति व न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ही आवास की जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, अगली तारीख 13 नवंबर निर्धारित की है।
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह किसान के अधिवक्ता भाई वीरसिंह राजपूत ने पुलिस पर पूर्व जिलाध्यक्ष को लापता करने का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि 18 अक्टूबर की रात करीब 1 बजे भाई के पेट्रोल पंप पर कुछ लोगों से मामूली विवाद हो गया था। मामले में कोतवाली के इंस्पेक्टर पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे। आरोप लगाया कि पुलिस उनके भाई को अपने साथ ले गई थी। साथ में राइफल, सीसीटीवी कैमरा का डीवीआर व कुछ कैश ले गए थे। जिसके बाद उनके भाई का कहीं पता नहीं चला। प्रीतम सिंह किसान के बेटे ने उच्च न्यायालय में वाद दायर किया था। न्यायालय ने पुलिस को आदेश दिया था कि सोमवार तक प्रीतम सिंह को न्यायालय में पेश किया जाए। जिसके बाद 31 अक्टूबर को पुलिस ने प्रीतम सिंह किसान की तलाश में पेट्रोल पंप पर उनके कमरे का ताला तोड़ा था। सोमवार को न्यायालय ने कहा कि प्रीतम सिंह के आवास की तलाशी व परिजनों से पूंछताछ के लिए एसपी को सीजेएम कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। सीजेएम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ही जांच पड़ताल की जा सकती है। वहीं, कोर्ट ने पूर्व जिलाध्यक्ष के वकील को अभी तक की कार्रवाई को लेकर अपने पक्ष का शपथ पत्र दाखिल करने के लिए कहा। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई के लिए 13 नवंबर की तारीख नियत की है।