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पांच किसानों की मौत

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फसलों की बर्बादी का दंश झेल रहे किसानों का धैर्य साथ नहीं दे रहा है। गुरुवार को फसल बर्बादी के चलते सदमे से पांच लोगों की मौत हो गई। एक हृदय विदारक घटना बुधवार की रात सहुरापुर गांव में हुई। जहां अगले माह दुल्हन बनने का सपना संजोए एक युवती सदमे का शिकार हो गई। वहीं एक हादसे में एक महिला भी अपने देवर की मौत सुनकर चल बसी।
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मौदहा तहसील क्षेत्र के बिवांर कसबा निवासी स्व.बृंदावन सिंह की पत्नी माया (61) खेती किसानी का कार्य करती थीं। 8 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे खेत गई थी। जहां पर फसलों में भारी क्षति देखकर उदास मन से घर लौटी। उसे रात भर नींद नहीं आई। मृतका के पुत्र अरुण सिंह ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसकी बेवा मां गुरुवार सुबह चारपाई से उठी और उठते ही चक्कर खाकर जमीन पर गिर गई।

सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने बताया कि दिमाग की नस फट जाने से मौत हो गई है। मौदहा प्रतिनिधि के अनुसार रीवन गांव में बीती शाम कृषक शिवदेव (60) पुत्र वृंदावन अपनी चने की फसल की मड़ाई कर शाम को घर आया। तो यह कहते हुए कि पैदावार कुछ नहीं हो रही और बैठे बैठे ही सदमे से मौत हो गई।
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इस घटना को सुन उसकी भाभी देवरती (65) भी रोते-रोते चल बसी। मृतक शिवदेव के पुत्र विनय ने बताया कि उनके पास तकरीबन 25 बीघा खेत है। 10 बीघे में चना बोया था। शेष खेतों में गेहूं की फसल गिरकर बर्बाद हो गई। पिता शिवदेव चने की मड़ाई करने के बाद मात्र दो ढाई क्विंटल पैदा होने पर निराश थे। बताया कि पिता ने स्टेट बैंक शाखा इचौली से 1.94 लाख का केसीसी दो वर्ष पूर्व बनवाया था। लेकिन बीते वर्ष भी वह पैसा नहीं अदा कर सके ।

इस वर्ष फसल बर्बादी से यह उम्मीद भी खत्म हो गई। इसी तरह अरतरा गांव निवासी श्याम पांडेय (64) पुत्र जागेश्वर की भी रात 11 बजे चना व मसूर की फसल की पैदावार बेहद कम होने से सदमे से मौत हो गई। गांव प्रधान भागवत प्रजापति ने बताया कि किसान के पास लगभग 28 बीघे जमीन है। 18 बीघे में चना व मसूर की फसल बोई गई थी।

लेकिन इनकी पैदावार डेढ़ दो क्विंटल के आसपास हुई। कम पैदावार देख वह गुमसुम हो गए और रात लगभग 10-11 बजे उनकी सदमे से मौत हो गई। पौथिया प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के सहुरापुर गांव निवासी बेवा भूरी ने चार वर्ष पूर्व पति जगमोहन सिंह की मौत के बाद बेटी अंजनी और बेटे अरविंद व रावेंद्र का लालन पालन बखूबी किया।

अरविंद ने बताया कि मां ने बहन अंजनी की शादी कोटरा मकरंदपुर गांव में तय कर दी थी। शादी 19 मई को होनी थी। बताया कि उसकी मां भूरी दो दिन पूर्व अपने 6 बीघा खेत की कटाई करने गई। खेत से कटाई कर शाम को जब घर पहुंची तो अपनी बेटी से कह दिया कि वह कितनी अभागिन है।

हर साल इन खेतों में कुछ न कुछ पैदा हो जाता था। लेकिन इस साल जब तेरी शादी करनी है तो खेतों में कुछ नही निकल रहा है। शादी कैसे होगी यह कहकर रोने लगीं। बहन अंजनी मां की ऐसी हालत को बर्दाश्त नही कर पाई और गुमसुम रहने लगी। जिस पर उसका इलाज कराया गया।

डाक्टर ने बीपी लो होने की बात कही और दवाएं लिखीं। इसके बाद बुधवार की रात उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने घटना की सूचना लेखपाल व कानूनगो की भी दी है। लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा है। परिजनों ने अंजनी का अंतिम संस्कार कर दिया।
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