फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hamirpur News: बच्चों का प्रदर्शन रंग लाया, कीचड़ साफ... दिखने लगी सड़क

विज्ञापन
फोटो13एचएएमपी 19- अंडर पास के नीचे ईंटे को बिछाती जेसीबी। संवाद
विज्ञापन
हमीरपुर। महीनों से कीचड़ और जलभराव से जूझ रहे चंदूपुर के डेरों की तस्वीर अब बदलने लगी है। जिन बच्चों ने कच्ची सड़क के खिलाफ मोर्चा खोलकर अफसरों को आईना दिखाया था उनकी आवाज का असर अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। बजरी के बाद दूसरे दिन सड़क पर ईंटें बिछाई गईं तो जेन अल्फा के चेहरे खिल उठे। ग्रामीणों को भी लगने लगा है कि अब पक्की सड़क जरूर बनेगी।
विज्ञापन


मंगलवार को चंदूपुर ग्राम पंचायत के मजरा गुसाईंबाबा का डेरा, पचुआ का डेरा, बच्ची का डेरा, चिनकू का डेरा और भिखुआ का डेरा के अलावा नगर पालिका परिषद हमीरपुर क्षेत्र में आने वाले वनवासी का डेरा और ब्रह्मा का डेरा इलाके के स्कूली बच्चों ने अभिभावकों के साथ पहले पैदल मार्च निकाला और कलक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया था।
ये सभी जिलाधिकारी से मिलने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। बावजूद करीब पांच घंटे प्रदर्शन कर प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। असर यह रहा कि बुधवार को अफसरों ने पहले कच्चे मार्ग पर बजरा बिछवाया फिर बृहस्पतिवार को सीडीओ अरुण कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार और सदर एसडीएम अभिषेक कुमार ने टीम के साथ डेरों में डेरा डाल दिया।
विज्ञापन

तेज धूप और गर्मी के बीच अफसरों ने भी खूब पसीना बहाया तो सड़क सुधार के काम ने भी रफ्तार पकड़ ली। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया तो प्रशासन ने भी रास्ता निकाल ही लिया। अंडरपास के नीचे ईंटें डलवाईं तो बच्ची के डेरा के पास मोड़ पर भी ईंटें बिछाकर रोलर चलवाया गया।
बरसाती में अब कठिन नहीं होगी डगर
कुछ दिन पहले जिस रास्ते पर पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं था, वहां अब ग्रामीण बाइक निकालने का सपना देखने लगे हैं। अब बरसाती दिनों में भी डगर कठिन नहीं होगी। गंगवा का डेरा, बच्ची का डेरा समेत आसपास के डेरों के लोगों का कहना है कि उन्होंने सड़क के लिए हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन बात आश्वासन से आगे नहीं बढ़ी। आखिरकार प्रशासन ने हमारी सुन ली। ग्रामीण शीलम, रागनी, शिवशंकर, संस्कार, सत्यम, धीरज, लक्ष्मी, प्रतीक्षा, सोनी, अनसूया, उमा, काली, सुधा, धर्मेंद्र, चांदनी, राजेश, दीपू, मीरा और रमाकांती समेत सभी खुश हैं।
बुढ़ापे में इतने अफसर पहली बार इस गांव मा देखे
डेरा निवासी सुकुर्तिन, प्रेमा और सुदामा का कहना है कि जब से इस गांव में ब्याह कर आई हैं तब से परेशानी से ही जूझती रहीं। सड़क तो थी लेकिन बीच में कच्ची सड़क नासूर बनी हुई थी। बुढ़ापे में इतने अफसर पहली बार इस गांव मा देखे हैं, जो स्वयं मौजूद होकर काम करा रहे हैं। सड़क को चलने लायक किया जा रहा है, इस बात की खुशी है।
ग्रामीण बोले-विधायक ने भी खूब दिए कोरे आश्वासन
गंगवा के डेरा निवासी अशोक निषाद का कहना है कि गांव में चौपाल आयोजित हुई तब विधायक डॉ. मनोज कुमार प्रजापति ने जो आश्वासन दिए वही पूरे नहीं हुए। सड़क की समस्या उनके सामने भी रखी गई, आश्वासन हर बार मिला लेकिन धरातल पर सब शून्य रहा। बरसात के दिन किन दुश्वारियों में गुजरे हैं, यह दर्द शब्दों में बयां नहीं कर सकते। यहां तो हालात तब और बदतर हो गए जब वन विभाग ने सिटी फॉरेस्ट से निकलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद आंदोलन के अलावा स्कूली बच्चों के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।


विधायक बोले-समस्या पुरानी हो तो समाधान एक दिन में नहीं निकलता

सदर विधायक डॉ. मनोज कुमार प्रजापति का कहना है कि चंदूपुर एवं मजरों में पैदल घूमा हूं। चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनीं और समाधान कराने का हर संभव प्रयास किया। सड़क के लिए भी प्रशासन से समन्वय स्थापित कर शासन को पत्र भेजा। समस्या पुरानी हो तो समाधान एक दिन में नहीं निकलता। सड़क बनने की एक प्रक्रिया है जो चल रही है और जल्द ही वहां पर पक्की सड़क विकास कार्य के रूप में नजर आएगी।
विज्ञापन

फोटो13एचएएमपी 19- अंडर पास के नीचे ईंटे को बिछाती जेसीबी। संवाद

फोटो13एचएएमपी 19- अंडर पास के नीचे ईंटे को बिछाती जेसीबी। संवाद

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें