हमीरपुर। सुमेरपुर थानाक्षेत्र के जलाला गांव के पास हुए दोहरे हत्याकांड में थानाध्यक्ष और चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है। मामा और भांजे के लापता होने की शिकायत को इन दोनों ने गंभीरता से नहीं लिया। एसपी ने दोनों को लापरवाही का दोषी माना है। इस मामले में कानपुर पुलिस कमिश्नर पहले ही बर्रा के एडिशनल इंस्पेक्टर व गुजैनी चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर चुके हैं।
12 मार्च को कानपुर के बर्रा एलआईजी 37-38, वैष्णवी बिहार, जरौली फेस-2 निवासी मयंक शर्मा अपने भांजे विपुल शर्मा के साथ पैसों के लेनदेन को लेकर पत्योरा गांव संतराम के बुलाने पर आया था। गांव पहुंचने के बाद इन दोनों के मोबाइल स्विच ऑफ हो गए। 13 मार्च को मयंक की बहन प्रिया शर्मा ने सुमेरपुर थाने में आकर भाई मयंक शर्मा व बहन के पुत्र विपुल के गायब होने की सूचना देकर तलाश करने की गुहार लगाई। पुलिस ने लापरवाही बरते हुए उसके प्रार्थना पत्र पर गौर नहीं किया। 14 मार्च को प्रिया शर्मा ने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई। पुलिस ने तब भी सक्रियता नहीं दिखाई और 16 मार्च को मयंक और विपुल के शव जलाला व झंझरिया डेरा के बीच खेतों में बने एक पुराने कुएं से बरामद हुए। प्रिया शर्मा व उनके परिजनों ने पोस्टमार्टम के दौरान पुलिस पर अनदेखी का आरोप लगाकर जेल के पास जाम लगाने का प्रयास किया था। पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित ने थानाध्यक्ष रामेंद्र तिवारी व पत्योरा चौकी इंचार्ज नंदकिशोर यादव को निलंबित कर दिया। पुलिस आरोपी संतराम, उसके पिता शंकरी व मामा रामस्वरूप को गिरफ्तार कर चुकी है। कोर्ट ने तीनों को जेल भेज दिया था।
..तो बच सकती थी विपुल की जान
हत्यारोपी मयंक और विपुल को लेकर खेत पर गए। होरा भूनते वक्त विपुल को पानी लेने भेज दिया। इसी दौरान मयंक की गला दबाकर हत्या कर दी। लौटकर आया विपुल मामा को न देख भागा और खेतों में काम कर रहे लोगों से बचाने की गुहार लगाई। किसी भी ग्रामीण ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद विपुल की भी हत्या कर दी गई थी। ग्रामीणों का मानना है कि घटना स्थल पर मौजूद किसान व मजदूर अगर चाह लेते तो विपुल की जान बच जाती लेकिन हत्यारोपियों को रोकने का साहस कोई नहीं जुटा सका। दोनों के शव 200 मीटर के फासले पर पड़े रहे। रात के अंधेरे में शवों को बोरों में भरकर पांच किमी दूर भदवां के कुए में फेंक दिया गया। समाजसेवी जगन्नाथ निषाद ने बताया कि घटना के वक्त कई लोग आसपास मौजूद थे। उन्होंने दूसरे युवक की हत्या करते देखा है। हत्यारोपियों से भिड़ने का कोई साहस नहीं जुटा पाया। प्रधान प्रतिनिधि अरविंद निषाद ने कहा दोहरे हत्याकांड से गांव में होली बदरंग रही।
छोड़ दिया था राजमिस्त्री का काम
मुख्य हत्यारोपी संतराम दो वर्ष पूर्व राजमिस्त्री का काम करता था। उसे 700 से 800 रुपये की दिहाड़ी रास नहीं आई। जल्दी करोड़पति बनने के लिए एनजीओ के माध्यम से सट्टेबाजी व लोगों से ठगी करने लगा। नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लाख, आवास के लिए 20 से 25 हजार, सिलाई मशीन के लिए एक से दो हजार रुपये तक लेता था।