- हमीरपुर की साध्वी पर हाईकमान की नजर
- हिंदुत्व महिला पिछड़ा समीकरण एक साथ साधने की चर्चा
अमित कुमार शुक्ल
हमीरपुर। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा से पहले राजनीतिक गलियारों में जिस नाम ने सबसे ज्यादा हलचल मचाई है, वह हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति। हमीरपुर के एक साधारण निषाद परिवार की साध्वी निरंजन ज्योति का नाम सियासी गिलयारे में हैं। राम मंदिर आंदोलन, संघ परिवार की राजनीति और केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री पद तक पहुंचीं। अब साध्वी संगठन में प्रदेश अध्यक्ष की सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रहीं है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से साध्वी निरंजन ज्योति की मुलाकात के बाद से उनके नाम ने अचानक गति पकड़ ली है। चर्चा यह है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी महिला नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर न सिर्फ हिंदुत्व की पहचान को और धार देना चाहती है, बल्कि अति पिछड़े निषाद समाज और महिला वोटबैंक की ओर भी मजबूत संदेश देने की तैयार कर रही है।
साध्वी निरंजन ज्योति का जन्म 1967 में हमीरपुर जिले के सुमेरपूर ब्लाक में पत्योरा गांव में हुआ। पिता शिवप्रसाद और माता शिवकली देवी के यहां जन्मी निरंजन ज्योति का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। बचपन से ही वे धार्मिक प्रवचनों और साधु-संतों के सानिध्य में रहीं। सुमेरपुर ब्लॉक के मलिहाताला गांव में खड़ेश्वरी महाराज के प्रवचन और यज्ञ कार्यक्रमों ने उनके मन में वैराग्य की भावना जगा दी।
कक्षा 12 तक की पढ़ाई कौशांबी में करने के बाद उन्होंने कानपुर देहात के मूसानगर स्थित आश्रम में स्वामी अच्युतानंद शास्त्री से 12 वर्ष की उम्र में दीक्षा ली और साध्वी जीवन अपना लिया। इसके बाद वे विश्व हिंदू परिषद, दुर्गा वाहिनी और साध्वी ऋतंभरा, साध्वी उमा भारती के साथ देशभर में राम मंदिर आंदोलन और सनातन धर्म के प्रचार से जुड़ी रहीं।
रामकथा और प्रवचनों के बीच ही साध्वी निरंजन ज्योति धीरे-धीरे भाजपा संगठन से जुड़ती गईं। सबसे पहले हमीरपुर जिले में बतौर कार्यकर्ता उनकी पहचान बनी। संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत में साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की रेस में अपने नाम की कोई जानकारी नहीं है। हम पार्टी कार्यकर्ता है और जो जिम्मेदारी मिलती है उसका निर्वहन करती हूं।
बीजेपी के लिए सामाजिक इंजीनियरिंग
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा साध्वी निरंजन ज्योति पर बड़े सियासी संदेश के रूप में दांव लगा सकती है। वे अति पिछड़े निषाद–मल्लाह समाज से आती हैं, जो पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य यूपी में एक बड़ा वोटबैंक है। साथ ही, वे साध्वी हैं, भगवा वस्त्र धारण करती हैं और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रही हैं, इसलिए कोर हिंदुत्व समर्थक वर्ग भी उनसे जुड़ाव महसूस करता है। यदि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है तो उत्तर प्रदेश भाजपा को आजादी के बाद पहली महिला प्रदेश अध्यक्ष मिलेगी। इससे पार्टी एक साथ हिंदू नेतृत्व, महिला सशक्तिकरण और पिछड़े वर्ग की भागीदारी तीनों संदेश दे सकेगी। 2024 के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा–दलित–अल्पसंख्यक) फार्मूले के जवाब में भाजपा इसे एक मजबूत काउंटर माना जा रहा है।
निषाद समीकरण और हमीरपुर का संकेत
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद लगातार बुंदेलखंड और पूर्वांचल के दौरे कर रहे हैं। बीच-बीच में आए उनके तीखे बयानों के बाद गठबंधन राजनीति पर सवाल उठे थे। ऐसे में भाजपा निषाद समाज के भीतर सीधे नेतृत्व तैयार कर रही है। हाल ही में हमीरपुर जिले में निषाद समाज की शकुंतला निषाद को जिलाध्यक्ष बनाए जाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह फैसला पैनल में नाम न होने के बावजूद शीर्ष नेतृत्व ने लिया, जिसे संगठन में महिला और निषाद समुदाय को एक साथ सशक्त करने के संदेश के रूप में देखा गया।
बिहार का अनुभव भी चर्चा में
बिहार चुनाव में महिलाओं का वोट एनडीए के पक्ष में निर्णायक रहा। इसी को लेकर भाजपा उत्तर प्रदेश में भी महिला नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। साध्वी निरंजन ज्योति इस समीकरण में फिट बैठती हैं – महिला, पिछड़ा समाज और हिंदुत्व तीनों का संतुलन उनके नाम से जुड़ा है।