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ग्रामीणों का हंगामा, नहीं खुलने दी बैंक

Wed, 30 Nov 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
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गहरौली में बैंक के बाहर बैठे ग्रामीण। - फोटो : Amar ujala
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पिछले चार दिनों से बैंक में कैश नहीं आ रहा है। इससे नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार को इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के बाहर शाखा प्रबंधक के पहुंचने पर जमकर हंगामा काटा। जिससे बैंक प्रबंधक ताला ही नहीं खोल सके। सुरक्षा में लगी पुलिस के समझाने के बाद भी ग्रामीण नहीं माने। फलस्वरूप शाखा प्रबंधक ने मामले की सूचना उच्चाधिकारियों को दी और स्टाफ  सहित घर चले गए।
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नोटबंदी के 20 दिन बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकाें की भुगतान व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। जिसके कारण ग्रामीणों को शादी व इलाज के लिए भी रुपये नहीं मिल पा रहे हैं। खाद बीज के साथ रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी कैश की समस्या है। कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। गहरौली के इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में बीते सोमवार को भी कैश निकालने के लिए ग्रामीणों की भीड़ रही। मगर निराशा ही हाथ लगी।

मंगलवार को सुबह दस बजे के पूर्व ही बैंक में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाएं व पुरुष एकत्र हो गए। शाखा प्रबंधक आए और बैंक का ताला खोलने लगे। इस पर लोगों ने कैश होने की जानकारी मांगी। तो बताया कि आज कैश नहीं आएगा। इस पर लोगों में आक्रोश पैदा हो गया और उन्होंने हंगामा करते हुए बैंक का ताला नहीं खोलने दिया। शाखा प्रबंधक ने भीड़ से निकलकर बगल के एक मकान में शरण ली और पूरे मामले से अपने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।
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उच्चाधिकारियों ने कैश न भेजने की बात कहते हुए वापस घर जाने की बात कही। इस पर बैंक स्टाफ घर चला गया और बैंक बंद रही। ग्रामीण हेमंत गुप्ता ने बैंकाें में कैश की व्यवस्था कराने के लिए जिलाधिकारी से दूरभाष पर बात की। उसने बताया कि जिलाधिकारी ने कहा कि जब बैंक में रुपये आएगा, तब लीजिए। महिला ग्राहक रामसखी, रामसेवक, भूरी आदि ने बताया कि पिछले 15 दिन से रुपये निकालने के लिए बैंक के चक्कर काट रहे हैं। अभी तक एक रुपये नहीं निकले। जिसके कारण उनके सामने भरण पोषण का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे गांव में सैकड़ों परिवार नोटबंदी के संकट से जूझ रहे हैं।
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