रोडवेज डिपो में हजार व पांच सौ रुपये के नोटों की गड्डियां दिखाता कैशियर।
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सरकार लोगों की सुविधाओं को लेकर कुछ विभागों को पुराने नोट चलाने की छूट दे रही है। इसका फायदा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उठाने से नहीं चूक रहे हैं। स्थानीय रोडवेज डिपो की बसें जितना भी किराया ला रही हैं, वह पूरी की पूरी पुरानी करेंसी ही है। ऐसे में समझा जा सकता है कि ज्यादातर परिचालक अपने यार दोस्ताें व नाते रिश्तेदाराें के पुराने हजार व पांच सौ की करेंसी आराम से बदल रहे हैं।
स्थानीय रोडवेज डिपो में इन दिनों पुराने हजार व पांच सौ के ही नोटों की धूम हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब एक व्यक्ति दो हजार के नए नोट का छुट्टा कराने स्थानीय रोडवेज के डिपो में पहुंचा। डिपो में बैठे कैशियर विनोद निगम ने उसे पुराने हजार व पांच सौ के नोट दिखाते हुए कहा कि दिन भर में बहुत ही कम सौ, पचास व दस के नोट आ रहे हैं। सभी परिचालक बंद होने वाले नोट ही काउंटर में जमा कर रहे हैं।
वहीं, पास में खडे़ एक परिचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चेकिंग के दौरान कुछ अधिकारी उनके बैग की तलाशी लेते हैं और मिलने वाले छुट्टा नोटों को बदल लेते हैं। गौरतलब है कि यात्रा करने वाले यात्री क्या यात्रा के दौरान हजार, पांच सौ के नोट ही परिचालकों को देते हैं। ऐसे में छूट का फायदा उठातक रोडवेज डिपो के कुछ अधिकारी व कर्मचारी कालेधन को सफेद करने में जुटे हैं। मौजूदा समय में डिपो की प्रतिदिन की आमदनी करीब चार से पांच लाख रुपये है।