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नोट की चोट से किसान चित

Fri, 18 Nov 2016 11:45 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
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बिवांर में सहकारी समिति के बाहर खड़े किसान - फोटो : Amar ujala
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नई करेंसी को लेकर सबसे ज्यादा संकट में ग्रामीण जनता है। नोट की चोट से किसान चित हो गया है। गांव स्तर पर संचालित बैंकों से नई करेंसी नदारत है। ऐसे में खेती किसानी से जुड़े लोग खाद बीज के लिए भटक रहे हैं। वहीं, मजदूर वर्ग भी किसानों के यहां काम न मिल पाने से हलाकान है। सहकारी समितियों में खाद के साथ गेहूं बीज का पर्याप्त स्टाक है लेकिन जेब में नई करेंसी न होने से किसानों को मायूसी हाथ लग रही है।
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शुक्रवार को कुछ सहकारी समितियों का अमर उजाला टीम ने जायजा लिया तो पाया कि कई किसान खाद के लिए तो आए। लेकिन पुराने नोट होने पर उन्हें खाद नहीं दी गई। ये किसान समिति की अंश (ख) की चेक से खाद ले रहे किसानों के साथ गोदाम के अंदर तक जरूर पहुंचे। हालांकि इक्का दुक्का किसान गांव से उधार रुपये मांग कर लाए और खाद को साइकिल पर रखकर ले गए।

सहकारी समिति में सात किसान खाद लेने आए। इसमें चार किसान महेंद्र अवस्थी कुरारा, रमाकांत निवासी खरौंज अपने खाते से अंश (ख) की चेक के जरिए डीएपी खाद निकालते मिले। समिति में कुसमरा निवासी सूरज सिंह मिला। पूछने पर कहा कि वह दूसरी बार आया है। एक बोरी डीएपी लेनी है। एक हजार तीन रुपये की डीएपी खाद की बोरी का रेट है। इसलिए वह सुबह 10 बजे पुराने हजार और पांच सौ के दो नोट लेकर आया तो कर्मचारियों ने पुराने नोट लेने से मना कर दिया।
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इस पर उसे फिर वापस गांव जाना पड़ा। काफी परेशान दिख रहे इस किसान ने कहा पड़ोस के तीन लोगों से मांग कर रुपये लाया हूं। समिति में भैंसापाली गांव निवासी किसान बाबूराम ने कहा कि 12 बीघे खेत बुआई के लिए पड़ा है। क्या करें तीन बोरी डीएपी के लिए गांव के ही एक किसान से कर्ज लिया है। कुरारा कस्बे के देवेंद्र ने कहा कि तीन दिन बैंक में लाइन पर लगने के बाद रुपये मिलने पर अब दो बोरी यूरिया खरीद रहा है।

साधन सहकारी समिति, बिवांर में पहुंचने पर सन्नाटा मिला। सचिव रामफल यादव भी कार्यालय में ताला लगा रहे थे। पूछने पर कहते हैं कि खाद नहीं है। पुराने नोटों पर खाद बेंचे जाने की मनाही उनके महाप्रबंधक ने लगा दी है। अब दो दिन बाद डीएपी खाद आ सकेगी। कहा कि 300 बोरी खाद मिलनी है। उन्हें मुस्करा जाना है इसलिए ताला बंद कर रहे हैं।

गांव निवासी प्रकाश नारायण पाठक ने कहा कि उन्हें 20 बीघे में गेहूं बोना है। चार बोरी खाद है लेकिन इतने में काम नहीं चलेगा। पुराने नोट बंद होने पर बैंक में जमा करना है बैंक में भी पैसा नहीं मिल रहे हैं। कहते हैं कि अभी पांच बोरी डीएपी की और जरूरत है। उन्होंने कहा कि फसल बोने में लेट होने से उत्पादन कम हो जाएगा। दयाराम सविता ने बताया कि 20 बीघा खेत ठेके पर एक साल के लिए लिया है। अब तक इसमें 40 हजार रुपये खर्च कर चुका है। खेत में गेहूं खड़ा है। 14 बोरी यूरिया चाहिए। चार दिन इलाहाबाद बैंक में लाइन पर लगा रहा लेकिन पांच हजार रुपये नहीं मिल सके। समझ में नहीं आ रहा कि नई करेंसी कहां से लाए।

साधन सहकारी समिति, गहरौली सचिव के अभाव में बंद रहती है। खेती किसानी के मौके पर ही मुस्करा से सचिव मोहम्मद रईस आकर खाद का वितरण कर चले जाते हैं। करीब दस साल से यह क्रम चल रहा है। इमिलिया निकास स्थित बारात घर से खाद का वितरण होता है। गांव निवासी किसान टेकचंद्र ने कहा कि पिछले सप्ताह बारात घर में खाद आई।

लेकिन समिति के कर्मियों ने मुंह देखी व्यवहार किया। इसके चलते वह खाद नहीं ले सका। इधर, पुराने नोट बंद होने से एक बड़ी मुसीबत से जूझ रहा है। पांच बीघा खेत बुआई के लिए पड़ा है। लाला भइया राजपूत कहते हैं कि 16 बीघे खेत में गेहूं बोना है। वह समिति का सदस्य है। लेकिन 10 साल से वह इसका लाभ नहीं उठा पा रहा है। सचिव के न रहने से कई बार उसे मुस्करा समिति जाना पड़ा है। समिति में कर्मचारियों के न रहने से खाद बीज की समस्या हो रही है।
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