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सदर सीट पर दोनों बाहुबलियों की इज्जत दांव पर

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हमीरपुर। सदर विधानसभा सीट पर पिछले 33 वर्षों पर नजर डालें तो पांच बार क्षत्रिय विधायक और पांच बार पिछड़ा वर्ग का विधायक चुना गया है। यहां सवर्ण मतदाता निर्णायक वोटर माना जाता है। जिस दल की तरफ इनका रुझान हो गया उसी दल के प्रत्याशी की जीत पक्की मानी जाती है। हालांकि विकास के पैमाने की बात की जाए तो जनता की उम्मीदों पर कोई खरा नहीं उतर सका है। शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से आज भी पूरा क्षेत्र विरान है।
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33 वर्षो में सीट का इतिहास
1985 तक यहां कांग्रेस और जनता पार्टी का दबदबा रहा। 1989 में निर्दलीय अशोक सिंह चंदेल को जिताकर जनता ने विधानसभा भेजने का काम किया। वहीं चंदेल इसके बाद 1993 में जनता दल से, 2007 में सपा और 2017 में भाजपा से जीते। वहीं 1991, 1996, 2002 में बसपा से शिवचरण प्रजापति जीते। प्रजापति 2015 के उप चुनाव में सपा से जीते। 2012 में भाजपा से साध्वी निरंजन ज्योति जीती। वहीं अशोक चंदेल को सामूहिक हत्याकांड में उम्रकैद की सजा हो जाने पर वर्ष 2019 के उप चुनाव में भाजपा के युवराज सिंह जीते।
पति सलाखों में तो पत्नी ने संभाली कमान
चार बार विधायक रहे अशोक सिंह चंदेल आगरा की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। वहीं उनकी विरासत को अब उनकी पत्नी राजकुमारी चंदेल संभालने के लिए कांग्रेस से चुनाव मैदान में हैं। हालांकि वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस का कोई प्रत्याशी इस सीट से जीत दर्ज नहीं करा सका है।
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पिता ने छोड़ी राजनीति तो बेटे ने संभाली विरासत
चार बार सदर विधानसभा सीट से विधायक रहे शिवचरन प्रजापति ने वर्ष 2017 से राजनीति से सन्यास ले लिया और अपनी विरासत बेटे मनोज प्रजापति को सौंप दी। जिन्होंने वर्ष 2017 व उपचुनाव 2019 में सपा से चुनाव लड़ा और दोनों बार पराजय का मुंह देखना पड़ा। वहीं मौजूदा में सपा का दामन छोड़ भाजपा से चुनावी नैया पार करने को मैदान में हैं।
क्षेत्र के बड़े मुद्दे
खदानों से निकलने वाली मौरंग के ओवर लोड ट्रकों से बदहाल सड़कें हमेशा परेशानी का सबब बनी रहती हैं। कानपुर सागर टूलेन हाईवे, शहर में अतिक्रमण मुख्य समस्या है। चिकित्सकों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा एक बड़ा मुद्दा है।
जातिगत समीकरण
जिले में कुल मतदाता 411026 है। जिसमें पुरुष 224919 व महिला 186101 हैं। जिसमें दलित 50 हजार, मुस्लिम 45, हजार, निषाद 48 हजार, ठाकुर 40 हजार, ब्राह्मण 32 हजार, प्रजापति 30 हजार, अहिरवार 25 हजार, यादव 20 हजार, अन्य एक लाख 21 हजार मतदाता हैं।
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