फोटो 17 एचएएमपी 16- मुस्करा में मास्टर रोल संख्या 6033 में खड़े मजदूर। स्रोत- मनरेगा वेबसाइट।
हमीरपुर। महात्मा गांधी योजना (मनरेगा) का नाम सरकार ने जरूर बदल दिया है, लेकिन जिम्मेदार योजना में अपने मन का राग अलापते हुए जमकर पलीता लगा रहे हैं। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए शासन ने ऑनलाइन व्यवस्था लागू की, लेकिन उसे भी ठेंगा दिखा रहे हैं।
सबसे बड़ा खेल तो यह है कि मनरेगा वेबसाइट पर एक स्थान पर बैठकर आठ गांवों का एमएमएस (उपस्थिति) 18 किलोमीटर दूर से भरी जा रही है। हद तो तब हो गई, जब एक ही फोटो को अन्य गांवों में भी अपलोड किया जा रहा है।
जिले की 330 ग्राम पंचायतों में शासन द्वारा लगातार मनरेगा के तहत विकास कार्य कराए जा रहे हैं। मनरेगा में कागजों पर मजदूर और धरातल पर झूठ का खेल लगातार जारी है।मुस्करा विकासखंड के आठ गांवों में चकरोड व नाला आदि के खुदाई कार्य कराए जा रहे हैं। इसमें श्रमिकों की एक जनवरी की उपस्थिति में भ्रष्टाचार की बात सामने आई है। मास्टर रोल संख्या 6033 ग्रुप फोटो में दाएं से नीली साड़ी पहने महिला खड़ी है और उसी दिन दूसरे मास्टर रोल 5991 में भी यही फोटो इन्हीं श्रमिकों की दिख रही है।
बात और गंभीर हो जाती है जब क्षेत्र के खड़ेही लोधन गांव में चल रहे नाला खुदाई कार्य में उसी तारीख को मास्टर रोल संख्या 5925 में तीन महिलाएं दाएं से एक सफेद टी शर्ट पहने मजदूर के बगल से सुआपंखी, गुलाबी व सतरंगी साड़ी पहनें खड़ी हैं। वहीं, मास्टर रोल संख्या 5999 में भी यही मजदूर दिख रहे हैं। हालांकि फोटो की लोकेशन बदल दी गई है। एक व्यक्ति एक ही दिन में तीन-चार जगह मौजूद होकर मजदूरी कर रहा है, ग्रामीणों का कहना है कि इससे बड़ा भ्रष्टाचार क्या हो सकता है। जिले में लगातार कई ऐसे मामले उजागर हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार किसी पर भी कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
फोटो 17 एचएएमपी 16- मुस्करा में मास्टर रोल संख्या 6033 में खड़े मजदूर। स्रोत- मनरेगा वेबसाइट।