चिटफंड कंपनी के धोखाधड़ी करने पर उसके अभिकर्ताओं व एक उपभोक्ता ने सीजेएम न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने कंपनी के चार अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने का आदेश प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को दिए हैं।
मुख्यालय के सूफीगंज मोहल्ला निवासी पारुल निगम के अधिवक्ता बिजयेंद्र सिंह व राजकुमार सिंह तथा महेश प्रसाद साहू ने कोर्ट में इंफोकेयर कंपनी में वाद दायर किया। बताया कि उसके पति विकास निगम ने अलग-अलग तारीखों में पॉलिसी के तहत कंपनी में करीब 3.33 लाख रुपये जमा किए थे। बीमार होने पर उनके पति ने कंपनी को बांड वापस लेने की सूचना दी। धनराशि को वापस मांगा गया तो कंपनी नेे भुगतान से इनकार कर दिया।
छह सितंबर को एसपी व जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी के बारे में अवगत कराया गया। पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो न्यायालय की शरण ली। इसी प्रकार शैलेंद्र कुमार ने बताया कि वह कंपनी में अभिकर्ता व उपभोक्ता हैं। उसका व उससे जुडे़ अन्य लोगों का करीब दो लाख रुपया कंपनी पर है। जिसका भुगतान नहीं किया जा रहा है। संगीता रानी ने बताया कि वह कंपनी में धन नियोक्ता हैं। कंपनी की ओर से परिवाद पत्र साथ दिए गए बांड, डिवेंचर को प्राप्त किया है।
जिस पर उसने परिवारीजनों के लाखों रुपये बांड आदि में निहित किए हैं। मगर कंपनी उनकी धनराशि का भुगतान नहीं कर रही है। सीजेएम ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इस प्रकार कोई भी साक्ष्य बिना विवेचना कराए न्यायालय के सामने नहीं आ सकते। इस पर सीजेएम तीनों प्रार्थना पत्रों पर कंपनी के निदेशक कौशिक पात्रा, हरीश चटर्जी व सुरेश रेड्डी निवासी कोलकाता, चेयरमैन आलोक सिंह निवासी लखनऊ व एक अन्य निदेशक अभिजीत चक्रवर्ती के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दर्ज करने का आदेश प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को दिए। साथ ही विवेचना के आदेश दिए हैं। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि अभी आदेश की प्रति उन्हें मिली नहीं है। प्रति मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।