पानी पहुंचने के बाद मौदहा बांध।
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जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। डेड पड़ा बांध मौसमी बरसात से भरने लगा है। चालू माह में अब तक शुरू बारिश से बांध में 54 मिलियन क्यूबिक मीटर जलस्तर पहुंच गया है। 13 माह पूर्व गेटों की मरम्मत के लिए पानी निकाले जाने के बाद से डेड होने पर किसानों को रबी फसल में पानी नहीं मिल सका। इधर हो रही बरसात से किसानों को खरीफ व रबी की फसलों को भरपूर पानी मिलने की उम्मीद जगी है। बांध क्षेत्र में 222 एमएम वर्षा हो चुकी है। फिलहाल मौदहा डैम को अभी सात एमसीएम पानी की और जरूरत है।
मौदहा बांध का निर्माण 1976-77 में शुरू हुआ। जबकि लोकार्पण 1999 में जून माह में हुआ। डेम में 200 मिलियन क्यूसेक पानी भरने की क्षमता है। इस बांध का नाम बदलकर ब्रह्मानंद बांध कर दिया गया है। वर्ष 2004 से नहरों पर सिंचाई के लिए बांध से पानी छोड़ना शुरू हुआ। बांध में कुल 11 गेट हैं।
बीते वर्ष के जून माह की शुरूआत में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की टीम बांध का निरीक्षण किया। टीम ने शासन को भेजी रिपोर्ट में बांध के गेट मरम्मत योग्य बताए। जिसको लेकर शासन स्तर पर हुई उच्चाधिकारियों की बैठक के बाद बांध के फाटकों की मरम्मत कराने के फैसले के चलते 60 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी में 40 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी धीरे-धीरे नहरों और विरमा नदी में छोड़ दिया गया। फिलहाल बांध में डेड स्टोरेज 21 एमसीएम रहा।
वहीं पिछले वर्ष नाममात्र की बरसात हुई तो ले देकर गर्मियों में मुख्य नहर में पानी छोड़ा गया। जो 20 किमी तक नहर की तलहटी तक सीमित रहा। फिलहाल खाली पड़े इस बांध क्षेत्र में 222 एमएम वर्षा होने से बांध का जलस्तर बढ़कर 54 एमसीएम पर पहुंच चुका है। बांध में पानी की क्षमता अधिकतम 200 एमसीएम है। फिलहाल डैम क्षेत्र में हुई भारी वर्षा का लाभ किसानों को सिंचाई करने में मिलेगा।
मौदहा डैम बीते एक साल से खाली पड़ा है। बारिश की अभी शुरूआत हुई है। इधर बांध क्षेत्र में झमाझम बारिश जारी है। अभी तक 222 एमएम वर्षा हुई है। जिससे खाली पड़े बांध में 54 एमसीएम पानी भर चुका है। फिलहाल एक चौथाई बांध में पानी आ चुका है। मानसून को देखते उम्मीद है कि इस बार डैम पूरी तरह से लबालब हो जाएगा।
-आलोक कुमार सिन्हा, अधिशाषी अभियंता मौदहा बांध