रस्सा डालकर एमआर की तलाश करते स्थानीय गोताखोर।
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सुनहार नाले का रपटा पार करते समय कार समेत बहे एमआर अरुण सिंह सेंगर का अभी तक पता नहीं चला है। तलाश में लगे पीएसी की फ्लड कंपनी के जवानों और गोताखोरों को उनका एक जूता मिला। एमआर के साथ कार में सवार डॉ वीके मिश्रा का बुधवार को शव मिला था।
मंगलवार की रात करीब 11 बजे कबरई व ग्योड़ी में तैनात चिकित्सक डॉ. वीके मिश्रा व एमआर अरुण सिंह सेंगर कार से कानपुर के लिए चले थे। पारा गांव के निकट बारिश से उफनाए सुनहार नाले के रपटे में कार में फंस गई। पहले चिकित्सक और फिर एमआर नाले के बहाव में बह गए।
सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन के साथ जिला स्तरीय अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। कानपुर से पीएसी की फ्लड कंपनी बुलाई गई। पीएसी के जवानों ने बुधवार को तीसरे पहर नावों के माध्यम से खोजने का प्रयास शुरू किया।
मुख्यालय के गोताखोर लोहा सिंह भी छह साथियों के साथ जुटे रहे, उन्हें बुधवार की देर शाम घटनास्थल से पांच सौ मीटर दूर डॉक्टर का शव तो मिल गया, मगर एमआर का कुछ पता नहीं चल सका। गुरुवार को सुबह सात बजे से रेस्क्यू का कार्य शुरू हुआ। एमआर का एक जूता हाथ लगा है। एसडीएम सुरेश कुमार मिश्रा, सीओ आरएन सिंह मौके पर पहुंच गए।
मुख्यालय की गोताखोर टीम के लोहा सिंह व ग्रामीणों ने नाले के तलहटी में एक किमी तक लापता एमआर की तलाश की। इसके बाद पहुंची पीएसी टीम के कमांडर घनश्याम सिंह ने रपटे के अंदर रस्सी और कांटे डालकर देखा, मगर कुछ हाथ नहीं लगा।
पूरे घटनाक्रम व खोजबीन के दौरान अरुण सिंह की बहनें, भाई व अन्य परिजन मौजूद रहे । गोताखोर लोहा सिंह ने बताया कि बुधवार को चिकित्सक का शव एक कांटेदार पेड़ पर फंसा था। कानपुर से आई फ्लड कंपनी एसडीआरएफ के प्रभारी घनश्याम सिंह ने बताया कि टीम में 25 लोग हैं।