चित्रकूट। शारदीय नवरात्र का आगाज रविवार से हो रहा है। पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस बार करीब 100 साल बाद महाराज योग बन रहा है, जिसे बेहद शुभ और मंगलकारी माना जा रहा है।
नवरात्र को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। घरों, मंदिरों और देवी पंडालों में साफ-सफाई और सजावट पूरी कर ली गई है। कारीगर पंडालों को आकर्षक लाइट, फूल और रंग-बिरंगे कपड़ों से सजा रहे हैं। बाजार में पूजा सामग्री, लाल चुनरी, नारियल, शृंगार के सामान, मिट्टी के कलश और फल-फूल की खरीदारी के लिए भीड़-भाड़ है।
पंडित रमेश द्विवेदी और शिवभजन भारद्वाज ने बताया कि उदया तिथि के अनुसार शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार से हो रही है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार माता का आगमन हाथी पर माना गया है। यह सुख, समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक है। नौ दिन तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन और जागरण कार्यक्रमों की धूम रहेगी।
-
ये रहेगा शुभ मुहूर्त :
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
-
कोलकाता के कारीगरों ने सैकड़ों प्रतिमाएं बनाईं
राजापुर, चित्रकूट। शारदीय नवरात्र को लेकर राजापुर कस्बे और ग्रामीण अंचलों में उत्साह चरम पर है। कस्बे के नादिन कुर्मियान मोहल्ले में कोलकाता से आए कारीगरों ने सैकड़ों आकर्षक दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की हैं। इन्हें लेने के लिए क्षेत्र के गांवों से श्रद्धालु पिकअप और ट्रैक्टर से पहुंच रहे हैं। संवाद
जयकारों के साथ प्रतिमाओं को गांव-गांव ले जाया जा रहा है। कस्बे के जालपा देवी, शक्ति देवी, कंकाली माता, मरही माता और देवी जी तिराहा स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में साफ-सफाई और सजावट जोरों पर है। कस्बे में सैकड़ों पंडालों में प्रतिमा स्थापना की तैयारी है। देवी जी तिराहा मंदिर के संचालक राजू सिंह ने बताया कि 10 साल पहले तक लोगों को प्रतिमा लेने जबलपुर जाना पड़ता था। नादिन कुर्मियान में कारीगरों के आने से अब स्थानीय स्तर पर ही सभी आकार की प्रतिमाएं मिल जाती हैं।वहीं राजू सिंह पटेल ने बताया कि मंदिर में 10 साल पहले राजस्थानी पत्थर से बनी दुर्गा प्रतिमा स्थापित की गई थी, जिसके बाद से हर नवरात्र में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।