हमीरपुर। इस माह दिन और रात के तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव के चलते बच्चों में खांसी, जुकाम और वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। इससे मामूली लक्षण भी गंभीर रूप ले सकते हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को कुल 873 मरीजों ने पंजीयन कराया। इनमें 410 पुरुष, 332 महिला व 131 बालरोगी शामिल रहे। बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. आशुतोष निरंजन ने बताया कि सुबह दस बजे के बाद तेज धूप और शाम होते ही ठंड से छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। सर्दियों में श्वसन तंत्र संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। छोटे बच्चों में सर्दी-खांसी के मामूली लक्षणों की अनदेखी करना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
डॉक्टर ने कहा कि बच्चों में बुखार और खांसी सामान्य से ज्यादा दिनों तक रह रही है। इसके कारण दवा की डोज बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। संक्रमित व्यक्ति जब खांसता या छींकता है, तो वायरस और बैक्टीरिया सांस के जरिए फैलकर अन्य बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया होने पर सांस लेने और दूध पीने में दिक्कत हो सकती है। शनिवार को करीब 100 बालरोगियों का उपचार किया गया। इनमें 60 से अधिक बच्चे सर्दी, खांसी व वायरल बुखार से पीड़ित मिले हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को पौष्टिक आहार दें और समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं। साथ ही किसी भी तरह के श्वसन लक्षण की अनदेखी न करें, क्योंकि शुरुआती समय पर इलाज गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकता है।