हमीरपुर। पिछले वर्षों में वक्फ बोर्ड द्वारा जिले में बनाई गई संपत्ति का राजफाश जांच के दौरान हो गया है। जिले में 485 वक्फ संपत्तियों का दावा खारिज कर सरकारी जमीन होने का दावा किया गया है। मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। सिर्फ चार संपत्तियां राजस्व अभिलेखों में वक्फ में दर्ज हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी है।
शासन ने पिछले दिनों पूरे प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की जांच करा रिपोर्ट मांगी थी। जिसमें हमीरपुर में भी वक्फ संपत्तियों की जांच हुई। यह जांच राजस्व विभाग की टीम ने की थी। जिसमें पाया गया कि 485 संपत्तियां जिसमें वक्फ बोर्ड ने मुहर लगा दी थी। मगर जांच में वह वक्फ की संपत्ति नहीं साबित हो पाईं। जिले में केवल चार संपत्ति ऐसी है जो वक्फ के दायरे में आई हैं।
एडीएम सुरेश कुमार ने बताया कि सरकारी अभिलेखों में वक्फ संपत्ति दर्ज न होने का अर्थ है कि यह सरकारी भूमि है। सबसे ज्यादा मौहदा क्षेत्र में वक्फ संपत्ति होने का दावा किया गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि दफा 37 के रजिस्टर में 622 संपत्तियां दर्ज हैं। बीते दिनों हुए सर्वे में 545 मौके पर मिली हैं। चार वक्फ संपत्तियां राजस्व के अभिलेख में दर्ज हैं। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
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क्या हैं वक्फ संपत्ति
वक्फ ऐसी जमीनें जो किसी व्यक्ति या संस्था के नाम नहीं है, लेकिन मुस्लिम समाज से संबंधित है। वो वक्फ की जमीनें होती हैं। इसमें मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, ईदगाह, मजार और नुमाइश की जगहें आदि शामिल हैं। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समाज की जमीनों पर नियंत्रण रखने के लिए बनाया गया था। वक्फ की जमीनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने और जमीनों को गैर कानूनी तरीकों से बेचने से बचाने के लिए वक्फ बोर्ड बनाया गया था।