हमीरपुर/राठ। इन दिनों हवाएं सर्द हैं। पर, जनपद के लोगों को खटारा बसों में सफर करना पड़ रहा है। कहीं शीशे नदारद हैं तो कहीं शीशे टूटे हुए। ऐसे में सर्द हवाएं बस में सवार यात्रियों को कंपकंपा देती हैं। यह हालत तब है जब जनपद के दोनों डिपो अच्छी आय दे रहे हैं।
बता दें कि जनपद में रेलवे लाइन न होने से आवागमन के संसाधनों में मुख्य रूप से रोडवेज बस के दो डिपो हैं। यहां सर्वाधिक आमदनी होने के बाद भी तमाम बसें जर्जर हालत में हैं। ये बीच रास्ते में ही दगा दे जाती हैं, इसके बाद भी यात्री इन्हीं बसों में यात्रा करने के लिए मजबूर हैं। शहर के रोडवेज बस डिपो में अधिकतर बसें अपनी क्षमता से अधिक दूरी तय कर चुकी हैं। इससे हर दूसरे दिन एक बस बीच रास्ते खराब होने पर यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। यात्रियों का आरोप है कि अफसर भी बसों की काम चलाऊ मरम्मत कराकर खानापूरी कर रहे हैं।
हमीरपुर डिपो में कुल 63 रोडवेज बसें हैं। इनमें से पांच सरेंडर हो चुकी हैं। बाकी 58 बसें जरा सी दूरी तय करने में ही गड़बड़ हो जाती हैं। दरअसल करीब-करीब सभी बसें अपनी उम्र यानी आठ लाख किमी से अधिक दूरी तय कर चुकी हैं। बसें कानपुर, उरई, महोबा, दिल्ली समेत कई जिलों के लिए संचालित होती हैं। कई बसों की खिड़कियों में शीशे टूटे हैं। वहीं सबसे अधिक आय देने वाली राठ डिपो में भी सुविधाओं का अभाव है। जर्जर बसें रास्ते में दगा दे जाती हैं। 88 बसों के बेड़े में नौ बस मरम्मत के लिए खड़ीं हैं। झांसी, कानपुर, दिल्ली जैसे प्रमुख मार्ग पर सवारियों की संख्या अधिक है। राठ कस्बे का व्यापारिक केंद्र कानपुर शहर है। इस मार्ग पर शाम ढलते ही बसें उपलब्ध नहीं होतीं। चालक व परिचालकों की भरमार है, फिर भी बसें कम होने से यात्रियों को प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
डिपो का काम बेहद धीमा
चार साल पहले मुख्यमंत्री की ओर से राठ टर्मिनल की स्वीकृति दी गई थी। रोडवेज के दिन बहुरने की उम्मीद जगी। इस योजना के तहत बस स्टेशन को पूरी तरह से वातानुकूलित बनाकर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। बस स्टेशन व कार्यशाला का भी पुनर्निर्माण होगा। धन स्वीकृति के बावजूद योजना कछुआ गति से चल रही है।
वर्कशाप का होगा निर्माण
एआरएम ने बताया कि शहर के कुछेछा में पड़ी जमीन पर हर हाल में वर्कशाप बनवाएंगे। इसके लिए एसडीएम को पत्र लिख रहे हैं। जमीन की नपाई करानी है। डिपो की जमीन पर तालाब खुदा है। इसकी भीटों को समतल कराने के साथ ऊंचाई भी करानी पड़ेगी। वहां नदी की बाढ़ का पानी भर जाता है। इसमेें नीचेे वर्कशाप, पंप व स्टोर बनाएंगे।
अलग-अलग मॉडल की बसें हैं। रास्ते में खिड़कियों के शीशे गिर जाते हैं। अभी 15 बसों में शीशे लगवाएं हैं। शीशे लगवाने के लिए कानपुर भेजना पड़ता है। बसें बेहद पुरानी हैं। खराब बसों के यहां जो पार्ट्स उपलब्ध हैं, उसी से फिट कराते हैं।
-अकील अहमद, एआरएम
उरई डिपो की बस में तीन बेटिकट पकड़े
शहर डिपो के एआरएम अकील अहमद ने सोमवार सुबह कोहरे के बीच कस्बे में मनकी मोड़ पर उरई डिपो की बस को चेक किया। जिसमें 37 सवारियों में तीन बेटिकट मिले। एआरएम ने बताया कि अपनी कार से चेकिंग करने पर चालक परिचालक सतर्क हो जाते हैं। इसके चलते कभी स्कूटी तो कभी प्राइवेट साधन से बसों को चेक कर रहे हैं। सोमवार को यह प्राइवेट बस में बैठकर जांच करने पहुंचे थे। तीन यात्रियों के बिना टिकट पकड़े जाने पर उरई डिपो के एआरएम को बस के चालक रहमान व परिचालक पप्पूलाल साहू के खिलाफ पत्र लिखा है।