हमीरपुर। जनपद में अब तक एक भी कोल्ड स्टोर नहीं बन सका है। इसके चलते किसान ऐसी फसलों की खेती नहीं कर पा रहे हैं जिनका भंडारण कर बेहतर मुनाफा कमाया जा सके। सरकार हर साल अनुदान योजना चलाकर निवेशकों को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक इसका कोई खास असर नहीं दिखा है।
उद्यान विभाग की ओर से कोल्ड स्टोर निर्माण के लिए लागत का 35 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा जो निवेशक जिले में पहला कोल्ड स्टोर बनाएगा, उसे टॉपअप अनुदान के रूप में अतिरिक्त 15 फीसदी सहायता भी मिल सकती है। यह योजना हर वर्ष संचालित की जाती है, लेकिन अब तक कोई भी निवेशक योजना का लाभ लेकर कोल्ड स्टोर बनाने के लिए आगे नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि कोल्ड स्टोर बड़ा प्रोजेक्ट होता है और इसमें काफी पूंजी लगती है। शायद यही वजह है कि कोई भी अभी तक आगे नहीं आया है। दूसरा कारण यह भी माना जाता है कि जिले में आलू और हरी मटर जैसी फसलों की बड़े पैमाने पर खेती नहीं होती। साथ ही फल मंडी भी इतनी बड़ी नहीं है कि यहां से दूसरे जिलों को बड़े स्तर पर फल भेजे जा सकें। यही वजह है कि निवेशक कोल्ड स्टोर निर्माण में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
छह करोड़ के प्रोजेक्ट में दो करोड़ से अधिक का अनुदान
जिला उद्यान निरीक्षक सौभाग्य सोनी के मुताबिक कोल्ड स्टोर चार प्रकार के बनाए जाते है। इसमें टाइप वन का जो प्रोजेक्ट है उसकी अनुमानित लागत छह करोड़ है, इसमें दो करोड़ 10 लाख का अनुदान है। इसके अलावा जो पहला लाभार्थी होगा उसे 15 फीसदी अतिरिक्त अनुदान भी मिल सकता है। वहीं दूसरी तरफ 5000 एमटी क्षमता वाले कोल्ड स्टोर की लागत चार करोड़ 80 लाख है, इसमें भी 35 फीसदी अनुदान है।
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कोल्ड स्टोर होता तो मुनाफा कमाते किसान
बंधौली के प्रगतिशील किसान राजेंद्र सिंह का कहना है कि जनपद में एक भी कोल्ड स्टोर नहीं है, इस वजह से किसान फसल का उत्पादन रोक नहीं पाते। हम लोग टमाटर की खेती करते है, भाव नहीं मिलता फिर भी बेचना पड़ता है। कोल्ड स्टोर हो तो भाव बढ़ने का इंतजार किया जा सकता है। कोल्ड स्टोर बनता है तो किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
सरकारी कोल्ड स्टोर बनना चाहिए
टिकरौली निवासी जागरूक किसान रामकिशोर शुक्ल का कहना है कि जिले में कम से कम एक कोल्ड स्टोर होना बहुत जरूरी है। अगर कोई कोल्ड स्टोर बनाने के लिए आगे नहीं आ रहा तो यहां पर सरकारी कोल्ड स्टोर बनना चाहिए। किसानों को भी फसल का उत्पादन रोकने का अवसर मिल जाएगा। यहां पर किसान आलू, प्याज से लेकर अन्य खेती के लिए भी आगे आने लगेंगे।