मौदहा कस्बे में एक बड़े भूभाग में फैले मीरा तालाब का अस्तित्व खतरे में
लग रहा था। लेकिन प्रशासन की नजर पड़ते ही लगने लगा है कि अब इसके दिन
बहुरेंगे। तालाब की नपाई पूरी होते ही खुदाई का कार्य गति पकड़ चुका है।
इसके बाद जीर्णशीर्ण घाटों की मरम्मत व नए घाट के निर्माण कार्य कराया
जाएगा।
मीरा तालाब का अपना एक गौरव रहा है, यहां पहले कमल गट्टा व
सिंघाडे की खेती होती रही है। ताजियों के लिए यह करबला है। लेकिन देखते ही
देखते यह तालाब सिमटता गया और इसमें भारी अतिक्रमण व कब्जे होने लगे।
करीब
50 बीघे क्षेत्रफल में फैला यह तालाब सिमटकर राजस्व अभिलेखों में चार बीघा
ही बचा है। यह रहस्योद्घाटन स्थानीय लेखपाल ने अभिलेख खंगालने के बाद किया
है, जो चौंका देने वाला है।
मुख्यमंत्री के जल बचाओ अभियान योजना के तहत
आए शासन के आदेशों पर जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने प्रथम चरण में मीरा
तालाब की खुदाई और इसके घाटो के मरम्मत आदेश दिए हैं।
उपजिलाधिकारी प्रवीणा
अग्रवाल ने लेखपाल से इसकी नपाई व अतिक्रमण हटाने को कहा। नगर पालिका
परिषद द्वारा एक पखवारा पूर्व इस तालाब में पालिका ने जेसीबी से खुदाई शुरू
कराई, लेकिन यह कार्य बाद में बंद हो गया।
इसके बाद इस तालाब की खुदाई का
आकलन तैयार कर 6 लाख रुपये ठेके पर जेसीबी से खुदाई कराने का कार्य शुरू
किया गया है। इस समय तालाब की खुदाई का काम तेज है। तालाब के किनारों में
मिट्टी डाली जा रही है।
तालाब के पार में बनी बस्ती की ओर हुए अतिक्रमण को
हटाया जा रहा है। फिर भी भीटाें पर अभी कब्जा है। नगर पालिका परिषद के
अध्यक्ष प्रतिनिधि बाल्मीकि गोस्वामी ने बताया कि बारिश को देखते हुए युद्ध
स्तर पर तालाब की खुदाई का कार्य कराया जा रहा है। इसके बाद जीर्णशीर्ण
घाटों की मरम्मत व नए घाट के निर्माण कार्य कराए जाएंगे।