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Hamirpur News: लोक कलाएं बुंदेलखंड की पहचान

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फोटो 10 सीकेटीपी 15 संगोष्ठी में मौजूद छात्राएं। स्रोत: ​शिक्षक - फोटो : आंधी एवं बरसात में गिरी समर की कोठरी
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चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में शनिवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा और लोककला के संरक्षण पर केंद्रित विशेष संगोष्ठी हुई। वक्ताओं ने कहा कि लोककलाएं हमारी संस्कृति की आत्मा हैं, इन्हें बचाना जरूरी है।
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अध्यक्षता कर रहीं मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की विभागाध्यक्ष प्रो. नीलम चौरे ने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों की बहुमुखी प्रतिभा को निखारने के साथ शिक्षा को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ रही है। संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. कमलेश थापक ने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चार पुरुषार्थों के माध्यम से भारतीय दर्शन के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला।
प्रो. जयशंकर मिश्रा ने कहा कि मंडुलिया जैसी लोक चित्रकलाएं बुंदेलखंड की पहचान हैं, लेकिन उपेक्षा से लुप्त हो रही हैं। इन्हें पाठ्यक्रम और कार्यशालाओं से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा। वक्ताओं ने कहा कि कला-संस्कृति का समावेश शिक्षा को अधिक रचनात्मक बनाएगा। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. ललित कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. अजय आर. चौरे समेत अन्य शिक्षक-छात्र मौजूद रहे।
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