हमीरपुर। जेल में पिटाई से मौत के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से बंदी के परिजन आशंकित हैं। परिजनों का कहना है कि आरोपी अपने बचाव के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। ऐसे में अपना पक्ष रखने के लिए वह भी कैविएट दाखिल करेंगे। परिजनों का आरोप है कि आरोपियों की ओर से उन पर राजीनामा के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रलोभन दिया जा रहा है। वहीं, एसपी का कहना है कि बिना जांच और साक्ष्य के गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के सूरजपुर निवासी अनिल द्विवेदी को एससी-एसटी मामले में 11 सितंबर को जिला कारागार भेजा गया था। जेल में अनिल पर उद्दंडता का आरोप लगाकर 13 सितंबर की रात पिटाई की गई। इससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। 14 सितंबर को अनिल को जिला अस्पताल भेजा गया तो चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव पर सात-आठ चोटों के निशान मिले थे। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी चोट के निशान मिले थे। हालांकि मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया तो विसरा रख लिया गया था। इसके बाद परिजन जेलर समेत अन्य जेल कर्मियों पर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की थी। रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर परिजन बिना शव लिए घर चले गए थे।
इस दौरान डीआईजी जेल ने निरीक्षण किया और डिप्टी जेलर व जेल वार्डर को निलंबन कर दिया गया। 16 सितंबर को अनिल की पत्नी पूजा की तहरीर पर जेलर केपी चंदीला, डिप्टी जेलर संगेश कुमार, जेल वार्डर अनिल यादव, नंबरदार दिलीप, दीपक, शफी मोहम्मद व रायटर बिनय के अलावा एक अज्ञात पर हत्या व वसूली की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसी मामले में देर शाम जेलर को भी निलंबित कर दिया गया। इसके बाद से आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से परिजनों में आक्रोश है। उनका कहना है कि आरोपियों को जानबूझकर बचने का समय दिया जा रहा है। वह बचाव के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेने की फिराक में हैं लेकिन वह इसके लिए कैविएट दाखिल करेंगे।
यह है कैविएट
न्यायालय में कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिनमें बिना दूसरे पक्ष को सुने बिना आदेश जारी कर दिया जाता है। इससे बचने के लिए लोग पहले से न्यायालय में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करते हैं। इसमें अपराध संख्या व वादी या बचाव पक्ष का नाम लिखते हैं और इस मामले में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगते हैं। इसे कैविएट (सूचनात्मक प्रक्रिया) कहते हैं। इस पर न्यायालय उस मामले पर सुनवाई से पहले दूसरे पक्ष को सूचित करता है। पक्ष जानने के बाद उस पर आदेश करता है।
राजीनामा के आ रहे दबाव
- परिजनों के अनुसार जिस दिन रिपोर्ट दर्ज की गई उसी दिन कई लोग तरह-तरह के प्रलोभन देकर जेलर का नाम हटाने की बात कह रहे थे। अनिल की पत्नी पूजा के अडिग रहने पर सब चुप हो गए। बताया कि कुछ लोग उनके यहां आए थे और दिल्ली में उनकी बात पहुंचाने की बात कह सादा कागज पर हस्ताक्षर की बात कह रहे थे। उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। कहा कि वह जल्द हाईकोर्ट जाएंगे और बात न बनने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंंगे।
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मामले की न्यायिक जांच के साथ पुलिस भी अपनी विवेचना में जुटी है। ऐसे मामलों में जांच व साक्ष्य के बिना गिरफ्तारी नहीं हो सकती। जैसे-जैसे साक्ष्य मिलेंगे कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
- डॉ. दीक्षा शर्मा, एसपी।