पड़ोसी जनपदों में फैले डेंगू से स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना है। जिले में भी जुलाई से अब तक नौ मरीज डेंगू से प्रभावित हुए हैं। हालांकि यह डेंगू मरीज बाहरी जनपदों से प्रभावित होने के बाद यहां आए थे।
जिला अस्पताल में डेंगू की जांच के लिए एलीजा किटें आ गई हैं। अब मरीजों को बाहर नहीं जाना होगा। साथ ही अस्पताल में तीन बेड का अलग से वार्ड भी बना दिया गया है।
जिला मलेरिया अधिकारी आरके यादव ने बताया कि जनपद की सीमा से लगे कानपुर, फतेहपुर और बांदा में डेंगू के मरीजों के मिलने के बाद यहां भी चौकसी की जा रही है।
जुलाई से लेकर अब तक नौ डेंगू के केस मिले है, लेकिन सभी लोग बाहर रहते हुए बीमार हुए। इलाज के बाद सभी ठीक है। जिन गांवों के मरीज मिले हैं वहां दवा का छिड़काव और बुखार पीड़ितों की स्लाइडें भी बनवाई गई हैं।
सदर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. पीएन गोयल ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की जांच के एलीजा किट आ चुकी है। अब अस्पताल में ही डेंगू की जांच होगी। डेंगू प्रभावित मरीजों के लिए तीन बेड का वार्ड भी बनाया गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एमके बल्लभ का कहना है कि जनपद में डेंगू का अभी कोई नया केस नहीं मिला है। इससे निपटने के सभी तरह के इंतजाम किए गए हैं। जिला अस्पताल में जांच की सुविधा भी है। इस बीमारी से बचाव के लिए जागरुकता जरूरी है। बुखार के लक्षण दिखने पर झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में न पड़े।
घर के आसपास व छत पर टूटे फूटे डिब्बे, गमले व अन्य बेकार के पात्रों में पानी न इकट्ठा होने दें। बच्चों को हाफ पैंट या हाफ शर्ट में घर, स्कूल या खेलने के लिए न भेजें। बुखार के साथ बहुत अधिक घबराहट होने पर लापरवाही न करें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।