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Hamirpur News: नाग पंचमी पर यमुना किनारे कूटी गईं गुड़िया

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फोटो 17 एचएएमपी 02- नाग पंचमी पर यमुना किनारे गुड़िया प्रवाहित करतीं महिलाएं और युवतियां। संव
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हमीरपुर। नाग पंचमी पर सोमवार को बुंदेलखंड की लोक परंपरा देखने को मिली। मेरापुर स्थित प्रसिद्ध संगमेश्वर मंदिर के पास यमुना किनारे बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां कपड़े से बनाई गई गुड़ियां लेकर पहुंचीं। पारंपरिक तरीके से गुड़िया कूटने की रस्म निभाने के बाद उन्हें यमुना में प्रवाहित किया गया। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में नई पीढ़ी भी उत्साह के साथ शामिल हुई।
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बुंदेलखंड के कई हिस्सों में नाग पंचमी पर गुड़िया पीटने की परंपरा निभाई जाती है। इसको लेकर अलग-अलग लोक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। एक मान्यता में इसे नाग देवता से जुड़ी कथा और अनजाने में हुई गलती के प्रतीकात्मक प्रायश्चित से जोड़ा जाता है। हालांकि इन कथाओं का कोई एक सर्वमान्य ऐतिहासिक आधार नहीं है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सुख-समृद्धि और भाई-बहन के रिश्तों की मजबूती की कामना के साथ महिलाएं और युवतियां इस परंपरा को निभाती हैं। हालांकि बदलते समय के साथ कई क्षेत्रों में यह परंपरा कमजोर पड़ रही है लेकिन कुछ स्थानों पर आज भी इसे उत्साह के साथ निभाया जा रहा है।
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नई पीढ़ी भी निभा रही परंपरा
स्थानीय निवासी श्रुति शुक्ला ने बताया कि नाग पंचमी पर गुड़िया बनाने और उसे यमुना में प्रवाहित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। परिवार के छोटे-बड़े सदस्य इसमें शामिल होते हैं। यह परंपरा लोक आस्था और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाती है। आधुनिकता के दौर में भी इस तरह की लोक परंपराओं के जरिए नई पीढ़ी अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हुई है।
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