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पांच दिन पूर्व यमुना नदी में मिले घड़ियाल की भूख से हुई मौत

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हमीरपुर। यमुना नदी में संगमहेश्वर मंदिर के घाट के नीचे झाड़ियों में एक घड़ियाल का शव उतराता मिला। घड़ियाल के मुंह का अगला हिस्सा कटा होने से अनुमान है कि शिकार न कर पाने की वजह से भूख से उसकी मौत हो गई। वनाधिकारी ने शरीर के अंदर चोटें होने के कारण मौत होने की पुष्टि की है।
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शहर से बह रही यमुना व बेतवा नदी में कहीं भी मगरमच्छ या घड़ियाल जैसे जलीय जीव नहीं हैं। लेकिन अक्सर बाढ़ के समय ऐसे जलीय जीव इन नदियों में आ जाते हैं। बीते चार मार्च को यमुना नदी में करीब दस फीट लंबा घड़ियाल दिखाई दिया था। इसके पूर्व यमुना नदी में जनपद कानपुर देहात के थाना मूसानगर में मुक्ता देवी मंदिर के पास पक्के घाट के पास इसे चरवाहों ने देखा था। मेरापुर निवासी रवि निषाद ने साथियों की मदद से इसे पकड़ा था। उसके मुंह का अगला हिस्सा कटा हुआ था। उसके मुंह में एक रस्सी भी बंधी थी, जिसे शिकारियों ने खोल दिया था। घड़ियाल पकड़े जाने की सूचना वन विभाग को दी गई थी। लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों के पहुंचने के पहले शिकारियों ने उसे नदी में छोड़ दिया था।
वनाधिकारी उमेश चंद्र राय ने बताया कि यह घड़ियाल है। चंबल नदी में इनकी संख्या अधिक है। वहीं से भटककर आया होगा। सीबीओ डा. देवेंद्र सिंह के साथ डा. बसंतराज, डा. अभिताभ सचान व अमित कुमार के साथ रेंजर बीएन पांडेय की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया है। कहा कि चोंच टूटने से मौत नहीं हो सकती है। घड़ियाल का विसरा प्रयोगशाला भेजा गया है।
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