हमीरपुर। जिले में ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का सुंदरीकरण होना है। जिले के सात मंदिरों का सुंदरीकरण के लिए राजकीय निर्माण निगम ने सर्वे भी किया था। जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। लेकिन शासन से बजट न मिलनेे के कारण ऐतिहासिक मंदिरों की दुर्दशा जस की तस है।
जनपद में सात प्राचीन ऐतिहासिक मंदिरों की चर्चा दूर-दूर तक है। मंदिर के दर्शन करने के लिए यहां देश, विदेश से भी लोग आते हैं। लेकिन मंदिरों का सुंदरीकरण न कराए जाने से अपनी व्यथा सुना रहे हैं। जिले के चौरादेवी मंदिर, कल्पवृक्ष परिसर, सुमेरपुर में गायत्री तपोभूमि, विरक्त आश्रम मौदहा में बाबा निजामी दरगाह कम्हारिया शरीफ, राठ का सागर तालाब व कुरारा में भैरवदेवी, भुवनेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन व घूमने के लिए लोग आते हैं।
यह मंदिर अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते हैं। सातों मंदिरों के कायाकल्प के लिए राजकीय निर्माण निगम ने सर्वे कर इनमें बोर्ड भी लगाएं हैं। जिसकी रिपोर्ट केंद्र व राज्य सरकार को सौंपी गई, लेकिन शासन से बजट पास न होने के कारण मंदिरों का कायाकल्प नहीं हो सका।
भुइयांरानी मंदिर के तालाब में स्नान से दूर होती बीमारियां
झलोखर के भुंइयारानी मंदिर से सटा एक प्राचीन तालाब है। मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से त्वचा संबंधी बीमारी से लोगों को निजात मिलती है। कई दशक पहले लोग तालाब में स्नान करते थे। लेकिन अब तालाब में स्नान करने से लोग परहेज करते हैं। गांव के राम मनोहर प्रजापति, सत्येंद्र अग्रवाल, राकेश शर्मा ने बताया तालाब किसी जमाने में बड़ा ही रमणीक था। लेकिन तालाब किनारे लोगों ने अतिक्रमण कर लिए है। घरों से गंदा पानी भी इस तालाब में गिरता है।
मंदिर की मिट्टी लगाने से दूर होती गठिया
मंदिर में बुंदेलखंड के आसपास और पड़ोसी राज्यों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं। गांव के अखिलेश सिंह गौर ने बताया मंदिर की मिट्टी लगाने से असाध्य बीमारी गठिया व बात रोग ठीक होता है। मंदिर की परिक्रमा करने के बाद चुटकी भर मिट्टी शरीर में लगाने से बीमारियां दूर होती हैं।
भुंइयारानी मंदिर के पास बना तालाब- फोटो : HAMIRPUR